शनिवार, 24 फ़रवरी 2024

विकास प्राधिकरण अप्रूव्ड कॉलोनी प्लाटिंग कौन सी होती है और फ्री होल्ड कॉलोनी जमीन कौन सी होती है

1 - D A  एप्रूव्ड ( डी ए से स्वीकृत) 
वह जमीन जो विकाश प्राधिकरण किसानों से खरीद कर स्वयं या किसी बड़े बिल्डर से शहरी आवासीय योजना के मानको का ध्यान रखते हुये उस जमीन पर विकाश करता और कराता है,वह जमीन D A  एप्रूव्ड कहलाती है। 

मानक जैसे - 
सबसे छोटा रोड 9 मीटर यानी 30 फुट बड़े रोड 12,18,30,मीटर होना चाहिये । 
योजना या कॉलोनी में पार्क,सीवर लाइन,मंदिर,पानी की आपूर्ति हेतु बड़ी टंकी,बिजली,गेट, इत्यादि सुविधायें होना अनिवार्य होता है।
ऐसी कॉलोनी या योजना में आपको अपने मकान का नक्शा स्वीकृत करना होगा , अन्यथा आप निर्माण नहीं कर सकेंगें

Free Hold Property (फ्री होल्ड संपत्ति)
वह जमीन जो प्राइवेट बिल्डर या कॉलोनाइजर किसानों से खरीद कर स्वयं आपने अनुसार उस जमीन पर विकाश करते है,वह जमीन फ्री होल्ड कहलाती है। ऐसी प्रॉपर्टी की आपके नाम पक्की रजिस्ट्री और दाखिला खारिज जिला तहसील परिसर में होता है। फ्री होल्ड कॉलोनी में सभी सुविधायें बिल्डर और कॉलोनाइजर के ऊपर निर्भर करती है। जब कॉलोनी में लगभग 60 प्रतिशत विकाश हो जाता है,उसके बाद सभी सुविधायें नगर निगम के आधीन आ जाती है जैसे - रोड,सीवर इत्यादि। 
ऐसी कॉलोनी या योजना में आपको अपने मकान के नक्से की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती।

नोट - यह जानकारी मीडिया एवं स्रोतों से इकट्ठा करके दी गई है आप यह जानकारी सही है नहीं खुद भी एक बार जरूर चेक करें । 

अवैध प्लाटिंग कॉलोनी कौन सी होती है ? अवैध प्लॉट खरीदने पर क्या परेशानी होगी

साथियों इस लेख में आप समझेंगे कि अवैध प्लॉट कॉलोनी कौन सी होती है किन कॉलोनीयों में आपको प्लॉट नहीं खरीदना चाहिए और आपके भविष्य में क्या समस्या आएगी।
अवैध कॉलोनी में कई प्रकार की समस्या आती हैं।

1. अवैध कॉलोनी का कोई भी लेआउट जारी नहीं होता है ना ही किसी प्रकार का नक्शा पास होता है। जिससे उस कॉलोनी में प्लाट खरीदने पर जो भी रोड रहती है वह सारी किसान के नाम ही रहती है उन सड़क वाले रास्तों को  बाद में फिर बदला या उन्हें भी बचा जा सकता है


2. कई बार अवैध प्रॉपर्टी डीलर जमीन को क्षेत्रफल से अधिक बेच देते हैं। कई बार देखा गया है कि तालाब ग्राम सभा कल्याण चारागाह नाला की जमीन को अपनी प्रॉपर्टी में शामिल करके बेच देते हैं। जिसे रजिस्ट्री कैंसिलेशन या अवैध निर्माण पर कार्रवाई होती है

3. कॉलोनिया अप्रूव्ड ना होने के कारण सरकार उसमें सुविधा नहीं देती जैसे शिविर लाइट पानी पार्क जैसी उसे कॉलोनी में कभी सुविधा नहीं मिलती हैं। ना ही भविष्य में उसे कॉलोनी में कोई बड़ा डेवलपमेंट हो पता है।

4. अवैध कॉलोनी कभी भी बाद में बैध नहीं बनाई जा सकती है क्योंकि उनमें रेवेन्यू विभाग NOC जारी नहीं करेगा ना ही पर्यावरण विभाग NOC जारी करेगा ना हीं ग्रीन ट्रिब्यूनल NOC जारी करेगा । इसी वजह से सरकार अवैध कॉलोनीयों पर प्रतिबंध लगाती है



गुरुवार, 22 फ़रवरी 2024

मिताक्षरा और दायभाग में अंतर

इस लेख में सरल शब्दों में शार्ट में आप जानेंगे कि मिताक्षरा और दाय  भाग में क्या अंतर होता है


 हिंदू विधि की  मिताक्षरा तथा दाएं भाग दो ही मुख्य शाखाएं हैं 

 मिताक्षरा के अनुसार- मिताक्षरा शाखा में पुत्र का पिता की पैतृक संपत्ति में जन्म से ही अधिकार होता है पुत्र पिता के साथ  स्वामी होता है  संपत्ति के हस्तांतरण करने का पिता का अधिकार उसके पुत्र के अधिकार के कारण नियंत्रण में होता है
.

2. हस्तांतरण के संबंध में- मिताक्षरा शाखा के अनुसार संयुक्त परिवार के संयुक्त  संपत्ति में अपने अंश को तब तक हस्तांतरित नहीं कर सकते जब तक कि वह अभिव्यक्त  साझेदार है



लेकिन अगर बात करें दाय भाग शाखा की तो इसके अनुसार


दाएं भाग शाखा में पुत्र का पिता की संपत्ति में अधिकार पिता की मृत्यु के पश्चात उत्पन्न होता है पिता का अपने जीवन काल में संपत्ति पर परम अधिकार होता है  पुत्र का उससे कोई संबंध नहीं होता प्रत्येक व्यक्ति का अंश उसकी मृत्यु पर दाएं के रूप में उसके  दायदो को प्राप्त होता है उत्तरजीविता का नियम यहां पर लागू नहीं होता है

2. इसके अनुसार संयुक्त परिवार का कोई भी सदस्य अभिभक्त्त (साझेदारी) संपत्ति में अपने अंश को हस्तांतरित कर सकता है




अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो इंसटाग्राम पर पूछ सकते हो     username  law advicer adv.akshay
 

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (UPRC) धारा 34 दाखिल खारिज

  दोस्तों आज बात करेंगे की  (UPRC) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 किसके बारे में प्रावधान       करती है






सबसे पहले  जान ले - उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (UPRC) की धारा 34 दाखिल खारिज  से संबंधित है



जब अंतर द्वारा (बैनामा) द्वारा भूमि के कब्जे में परिवर्तन हो तो  काबिज व्यक्ति को नाम परिवर्तन के लिए तहसीलदार के यहां रिपोर्ट करनी चाहिए रिपोर्ट की मियाद अवधि 3 माह है यदि तीन महा विक्रय दान या अंतरण तिथि से 3 माह और यदि पट्टा द्वारा अंतरण हुआ है तो कब्जा प्राप्ति से 3 महा गिना जाएगा  

  नोट   -   ऐसा नहीं है कि अगर आपने अंतरण के 3 माह तक अगर संपत्ति का नामांतरण नहीं कराया दाखिल खारिज नहीं करवाया तो बाद में नहीं होगा ऐसा बिल्कुल भी नहीं है बाद में भी आप का दाखिल खारिज हो जाएगा लेकिन मैं आपको यही राय दूंगा कि जैसे ही आप किसी भी संपत्ति का अंतरण ( रजिस्ट्री) करवाते हैं उसके तुरंत बाद दाखिल खारिज करवाले
राजस्व संहिता UPRC धारा 34 क्या है क्या प्रावधान है 

दोस्तों धारा 34  यह उपबंध करती है कि प्रत्येक व्यक्ति जो उत्तराधिकार द्वारा भूमि पर कब्जा प्राप्त करेगा या अंतर द्वारा भूमि पर कब्जा प्राप्त करेगा तो उसे कब्जे के परिवर्तन की सूचना तहसीलदार को 3 माह के अंदर देनी चाहिए  धारा 34 के अंतर्गत अंतरण की रिपोर्ट मिलने पर या अन्य किसी तरीके से उसकी जानकारी होने पर तहसीलदार ऐसी जांच करेगा जो उसे आवश्यक लगे  और यदि तहसीलदार को यह प्रतीत होता है कि अंतरण सही तरीके से हुआ है और उस पर कोई भी विवाद नहीं है तो वह खसरा खतौनी को तदनुसार संशोधित अथवा (दाखिल खारिज) करने का आदेश देगा करने का निर्देश देगा 

 तो दोस्तों उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 दाखिल खारिज से संबंधित है धारा 34 के अंतर्गत ही तहसीलदार को यह शक्ति दी गई है कि वह भूमि का दाखिल खारिज  करने का आदेश दे सके

महिला के नाम रजिस्ट्री करवाने पर कितने पैसों की छूट मिलती है

दोस्तों इस लेख में आप जानेंगे कि 

1.महिला के नाम जमीन की रजिस्ट्री करवाने पर कितने पैसों की बचत हो सकती है पुरुष की अपेक्षा महिला के नाम जमीन रजिस्ट्री करवाने पर कितने पैसों का फर्क आता है?

2. महिला के नाम जमीन रजिस्ट्री करवाने पर कब पैसों की छूट नहीं मिलती है?



 दोस्तों जैसा कि पिछले लेख में हमने बताया था कि ग्रामीण क्षेत्र की जमीन अथवा शहर क्षेत्र की जमीन जमीन की रजिस्ट्री कराने में  कितना खर्चा आता है

1.महिला के नाम जमीन रजिस्ट्री कराने में कितना खर्चा आता है ?

 जैसा की आप सभी लोगों को पता होगा कि महिला के नाम जमीन रजिस्ट्री कराने पर पुरुष की अपेक्षा खर्चा थोड़ा कम आता है 


 जैसे- यदि ग्राम क्षेत्र की जमीन है

तो वहां पर महिला के नाम रजिस्ट्री कराने पर जमीन की कीमत का  4 % परसेंट आपको स्टांप शुल्क देना पड़ेगा 

तो वही यदि ग्राम क्षेत्र की जमीन है  और  पुरुष के नाम रजिस्ट्री कराई जाती है तो वहां पर जमीन कीमत का   5 % परसेंट स्टांप शुल्क देना पड़ेगा 

यानी कि इससे यह स्पष्ट होता है कि पुरुष की अपेक्षा महिला के नाम रजिस्ट्री कराई जाए तो जमीन की कीमत का 1% परसेंट कम स्टांप शुल्क पर देना पड़ता है

 कितना अंतर आता है उदाहरण

 - मान लीजिए आप जो जमीन खरीद रहे हैं उसका सर्किल रेट कीमत  
₹1लाख रुपए है तो वहां पर पुरुष के नाम कराएंगे तो 1लाख का 5% स्टांप शुल्क देना पड़ेगा यानी 5000 रू

 वही यदि आप जमीन खरीद रहे हैं और जमीन का सर्किल रेट कीमत ₹1लाख  है तो वहां पर महिला के नाम कराएंगे तो 1 लाख का 4 % परसेंट स्टांप शुल्क देना पड़ेगा यानी 4000 रुपए 

तो इस हिसाब से महिला के नाम रजिस्ट्री करवाने पर 1 लाख कीमत की जमीन पर ₹1000 का अंतर पड़ा है 

उदाहरण नंबर 2 

इसी प्रकार यदि आप जो जमीन खरीद रहे हैं उसकी सर्किल रेट कीमत ₹10लाख है तो वहां पर पुरुष के नाम 10 लाख का 5%  यानी ₹50 हजार रुपए स्टांप शुल्क देना पड़ेगा

और वही यदि महिला के नाम आप जमीन खरीद रहे हैं उस जमीन का सर्किल रेट कीमत ₹10लाख रुपए है तो वहां पर महिला के नाम 10लाख का 4%परसेंट यानी कि 40,हजार का स्टांप शुल्क देना पड़ेगा

तो इस हिसाब से यहां पर महिला के नाम रजिस्ट्री कराने पर ₹10,000 का अंतर पड़ा 10 हजार की बचत होगी

नोट-  यदि आप शहरी क्षेत्र में जमीन खरीदते हैं तो वहां पर महिला के नाम जमीन के सर्किल रेट की कीमत का लगभग 6 %परसेंट स्टांप ड्यूटी लगता है और पुरुष के नाम 7% परसेंट स्टांप ड्यूटी देना पड़ता है यहां पर भी सिर्फ 1% का अंतर आ जाता है

2. महिला के नाम जमीन रजिस्ट्री कराने पर कब छूट नहीं मिलती है ?

 यदि आप जो जमीन खरीद रहे हैं उस जमीन की सर्किल रेट कीमत 10 लाख से ऊपर है तो महिला के नाम कराने पर भी 1% की स्टांप शुल्क से छूट नहीं मिलेगी 

10 लाख से ऊपर कीमत की जमीन खरीदने पर पुरुष और महिला के नाम रजिस्ट्री कराने पर सामान स्टांप शुल्क देना पड़ता है फिर वहां पर  छूट नहीं मिलती है

  उदाहरण

यदि आप जो जमीन खरीद रहे हैं उसकी सर्किल रेट सर्कल रेट कीमत 20 लाख रुपए हैं
 तो वहां पर पुरुष के  नाम  कराने  पर   20 लाख का 5 %परसेंट यानी कि ₹1 लाख स्टांप शुल्क देना पड़ेगा

और यदि आप जो जमीन खरीद रहे हैं उसकी सर्किल रेट कीमत 20लाख रुपए है
तो वहां पर महिला के नाम रजिस्ट्री कराने पर भी
 20 लाख का 5% परसेंट यानी ₹1लाख का स्टांप शुल्क ही लगेगा

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पैतृक संपत्ति क्या होती है

 

 इस लेख मे जानेंगे पैतृक संपत्ति क्या होती है


 सरल सब्दो मे पैतृक संपत्ति वह संपत्ति होती हे जो आप के पीड़ी दर पीड़ी [परूष वंशानुक्रम मे आती है ] मिलती है पैतृक संपत्ति वह संपत्ति भी होती है जो आप के दादा जी से आप के पिता जी को उतराधिकार से प्राप्त हुई है  वह संपत्ति भी पैतृक संपत्ति मानी जाएगी 

    

  फिर चाहे वह संपत्ति  आप के  दादा जी की सहसंपत्ति हो या पैतृक लेकिन जब दादा जी के बाद जब वह संपत्ति आप के पिता को उतराधिकार मे  मिलेगी तो  वह संपत्ति आप के लिए पैतृक संपत्ति होगी 


नोट - 1- अगर दादा जी की कोई सह संपत्ति है ओर आप के दादा जी आप के पिता जी को दान मे या वसियत मे दे जाते तो वह तो वह संपत्ति आप के पिता की सहसंपत्ति मनी जाएगी  ऐसी  संपत्ति आपके लिए पैतृक संपत्ति नहीं होगी



 पैतृक संपत्ति ऐसी संपत्ति होती है जिसमे सहदायकी की पुरूष संतान जन्म से हक प्राप्त करती है  पैतृक संपत्ति मे पुत्र का अधिकार जन्म से होता है इस लिए  पैतृक संपत्ति पर पुत्र का अधिकार जन्म से ही  होने के कारण  पैतृक संपत्ति पर पिता को सीमित अधिकार ही प्राप्त होते है इस लिए पिता  पैतृक संपत्ति  को बिना पुत्र की सहमति से ना ही  दान दे सकता है न ही किसी को वसियत कर सकता हे न ही बेंच सकता है 


नोट - लेकिन जो आप के पिता जी ने अपनी कमाई से अपनी मेहनत  अपने रुपयो से जो संपत्ति बनाई है वह  संपत्ति आप के पिता की सह संपत्ति होगी ना की  पैतृक संपत्ति   फिर जो आप के पिता की सह संपत्ति है आप के पिता जी अपनी सह संपत्ति को बेंच सकते है दान मे दे सकते है किसी को नही ववसियत कर सकते है 

रविवार, 6 अगस्त 2023

महिला की संपत्ति में उत्तराधिकार

क- पुत्र, थर्ड जेंडर संतान ,अविवाहित पुत्री, पुत्र का पुत्र ,थर्ड जेंडर संतान, अविवाहित पुत्री पुत्र के पुत्र का पुत्र थर्ड जेंडर संतान और अविवाहित पुत्री ,पूर्व मृत पुत्र की विधवा और पूर्व मृत पुत्र के पुत्र ,पूर्व मृत पुत्र की विधवा प्रति शाखा के अनुसार समान अंशों में

परंतु यह है कि प्रथम है उसी शाखा का निकटतम दूरतर को अपवर्जित कर देगा
परंतु द्वितीय यह कोई विधवा जिसने पुनर्विवाह कर लिया है अब वर्जित हो जाएगी

ख- पति या विवाहित थर्ड जेंडर पति या पत्नी

ग- विवाहित पुत्री

घ- पुत्री का पुत्र ,थर्ड जेंडर संतान और अविवाहित पुत्री

ड- पिता

च- विधवा माता

छ- भाई जो उसी मृत पिता का पुत्र हो या थर्ड जेंडर संतान सहोदर भाई या बहन हो जो उसी मृत पिता की संतान हो और भाई का पुत्र थर्ड जेंडर संतान और अविवाहित पुत्री पितृ शाखा अनुसार 

ज- अविवाहित बहिन

झ- विवाहित बहन

ञ- बहन का पुत्र थर्ड जेंडर संतान और अविवाहित पुत्री

जमीन का आपसी सहमति से बंटवारा

आज आप इस लेख में समझेंगे खेती की जमीन का आपसी बटवारा के बारे में विस्तार से 1.क्या आपसी बटवारा मान्य होगा? 2.आपसी बटवारा कानूनी तरीके से करने का प्रोसेस ? 3.आपसी बटवारा में कितना समय लगेगा ? 

1. क्या घर पर किया गया जमीन का आपसी बटवारा मान्य है ? - नहीं.  यदि आप किसी भी जमीन का बंटवारा लोगों की सहमति या अपने भाइयों अपने पार्टनर की सहमति से कर लेते हैं तो यह बंटवारा मान्य नहीं होता क्योंकि इसका कोई भी सरकारीी रिकॉर्ड नहीं होता है यदि बटवारा करने वाला व्यक्ति हो सकता है भविष्य्य में अपनी बात से मुकर जाए तो वह दोबाराा बटवारा के केस डाल सकता है इसलिए घर पर बिना कोर्ट के बिना सरकारीी बटवारा मान्य नहीं होता 

लेकिन यदि आप चाहें तो जमीन के सभी पार्टनर आपसी सहमति कोर्ट में देकर कोर्ट द्वारा वही बंटवारे का आर्डर जारी करवा सकते हैं जिससे केस लंबा नहीं चलेगा और कम समय में अंश निर्धारण हो जाएगा और उसके हिसाब से कुरा बना दिए जाएंगे और जो कि भविष्य में सभी पक्षों को मानने पड़ेंगे इस प्रकार से आप आपसी सहमति कोर्ट में देकर कोर्ट द्वारा बटवारा डिक्री करवा सकते हैं जो की मान्य होगा

2. आपसी सहमति से बंटवारे का कानूनी प्रोसेस क्या हैै ?- इसके लिए आपको कोर्ट में बटवाराा का दावा करना पड़े़े पड़ेगा जिसके बाद सबसे पहले अंशों कााा निर्धारण होगा उसकेेेे बााद अलग-अलग कुरा बनाया जाएगा और यदि आप सभी लोग बनााए गए कुरा पर सहमत हैं तो सहमती पत्र दे सकते हैं जिससे न्यायालय वही कुरा जारी कर देगा और वही आदेश देेेगाा जो कि आपका भविष्यय में वही आपका आपसी सहमति से हुआ सरकारी बटवारा कहलाएगा अगर आप इस पर आपसीी सहमति ना दी और आपने आपत्ति कर दी तो बंटवारे का मुकदमा कई वर्षों तक चल सकता हैै।

3. आपसी बटवारा कितने दिनों में हो जाता है- बटवारा केेेेे तीन चरण होते धारा 116 में अंश निर्धारित होता है धारा 117 में कुरा  उसके बाद दखल  आपसी सहमति से बंटवारा होने में सबसे कम समय लगता है यदि आप सभी लोग बंटवारे का दावा करते हैं और आपसी सहमति कोर्ट में दे देते हैं तो उसके बाद फिर लगभग आपको 3 महीने में पूरा बंटवारा हो सकता है 1 महीने के अंदर आपकेेे अंश निर्धारित होगे उसके बाद उस जमीन का अलग कुरा तैयार कियाा जायेगा और इनकााा आदेश्श व डिक्री जारी होगी इस तरीके सेेे लगभग 3 महीने का समय लग सकता है  



बुधवार, 8 सितंबर 2021

CISF और CRPF में अंतरऔर उनके कार्य

 इस लेख में जानेंगे कि CISF और CRPF में क्या अंतर होता है इनके कार्य क्या होते हैं और इनकी फुल फॉर्म के बारे में आप विस्तार से जानेंगे

फुल फॉर्म

CISF - Central Industrial Security Force
                 केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल

CRPF - Central Reserve Police Force
                    केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल


केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल 1969 मैं अस्तित्व में आया
यह भारत सरकार गृह मंत्रालय से जुड़ी होती है CISF इस समय परमाणु संस्थापनाओ, हवाई अड्डो, बंदरगाहों समुद्री पन्तनो, विद्युत संयंत्रों, संवेदनशील सरकारी भवनों, केंद्रीय उद्योग आदि को सुरक्षा कवच प्रदान करता है क्योंकि बड़े उद्योगों में बहुत ज्यादा पैसा इन्वेस्ट होता है और कुछ ऐसे उद्योग हैं


CISF के कार्य

 *हवाई अड्डे या अन्य बड़े उद्योग जहां पर खतरा भी रहता है जहां पर सुरक्षा करना  
*भारत में बड़े केंद्रीय उद्योगों की रक्षा करने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल जिम्मेदार है 
* बंदरगाहों की सुरक्षा करना
* भारत के अन्य बड़े उद्योगों को सुरक्षा प्रदान करना


दोस्तों जैसा कि आपने सुना होगा कि सीआईएसएफ के एक कर्मचारी ने सलमान खान को एयरपोर्ट पर चेकिंग करने के लिए रोका इससे आप समझ सकते हैं सीआईएसएफ हवाई अड्डा सरकारी भवनों आज उद्योगों को सुरक्षा प्रदान करती है


CRPF यह क्राउन प्रतिनिधि पुलिस के रूप में 27 जुलाई 1939 को अस्तित्व में आया स्वतंत्रता के बाद यह 1949 को सीआरपीएफ अधिनियम के लागू होने पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल बन गया 

CRPF केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सबसे बड़ा है। यह भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत काम करता है CRPF की प्राथमिक भूमिका पुलिस कार्रवाई में संघ शासित प्रदेशों की सहायता, केंद्र शासित प्रदेश और राज्य में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और आतंकवाद रुकने का कार्य करती है इसके अलावा वीआईपी सिक्योरिटी और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए भी सीआरपीएफ जिम्मेदार होती है

CRPF के मुख्य कार्य
  • दंगा नियंत्रण करना
  • काउंटर अलगाववाद  उग्रवाद से निपटना
  • वामपंथी उग्रवाद से निपटना
  •  चुनाव  में विशेष रूप से बड़े पैमाने पर सुरक्षा 
  • सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र शांति पालन 
  • प्राकृतिक आपदाओं के समय बचाव और राहत कार्य




रविवार, 5 सितंबर 2021

मोटरयान में परिवर्तन धारा 52 वाहनों में परिवर्तन सही है या गलत

दोस्तों इस लेख में आप जानेंगे क्या आप अपनी कार किसी भी मोटरसाइकिल अन्य वाहनों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन मॉडिफाई करा सकते हैं क्या यह मॉडिफाई कराना अवैध है 

मोटर यान अधिनियम 1988  धारा 52 मोटरयान में परिवर्तन-

1. कोई मोटरयान स्वामी यान में इस प्रकार का परिवर्तन नहीं करेगा कि रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र में दी हुई प्रविष्टियां उनसे अलग हो जो मूल रुप से विनिर्माता द्वारा विनिर्दिष्ट है‌
( सरल भाषा में कहें तो कोई भी व्यक्ति जिसके पास कोई कार है या कोई अन्य वहान है वह उसमें ऐसा बदलाव नहीं करवा सकता है जो कि उसकी रजिस्ट्री प्रमाण पत्र से अलग हो आपने कई बार देखा होगा कि रजिस्ट्री प्रमाण पत्र में साफ-साफ सब कुछ लिखा होता है कि वहां कितने सीसी इंजन का है इसमें कितनी सवारी बैठने की क्षमता है कितना भार उठाने की क्षमता है इसीलिए कोई भी वाहन स्वामी ऐसा कोई भी बदलाव नहीं करवा सकता है जैसा कि उसकी कंपनी द्वारा जो वाहन का रजिस्ट्री प्रमाण पत्र है उसके अलग हो)

परंतु यह भी है कि केंद्र सरकार किसी विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए उक्त विनिर्दिष्ट ढंग से अतिरिक्त अन्य ढंग से यान
( वाहन) में परिवर्तन के लिए छूट प्रदान कर सकती है

1. किसी मोटर वाहन का विनिर्माता केंद्रीय सरकार द्वारा जारी निर्देश पर केंद्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट ऐसे मानकों और विनर्देशों के अनुसार सुरक्षा उपकरणों या किसी अन्य उपकरणों में परिवर्तन या पुनः संयोजन करेगा

2. उप धारा 1 किसी बात के होते हुए भी कोई व्यक्ति रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी के पश्चआवर्ती अनुमोदन से उसकी स्वामित्व अधीन किसी यान में परिवर्तन कर सकेगा या उसे किसी रूपांतरित यान में बदलना कर सकता है

3. जहां मोटरयान में रजिस्ट्री करता प्राधिकारी के अनुमोदन के बिना कोई परिवर्तन किया गया है वहां यान का स्वामी परिवर्तन कराने की 14 दिनों के भीतर रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को जिसकी अधिकारिता के भीतर वह निवास करता है परिवर्तन की रिपोर्ट करेगा और विद फीस के साथ उस प्राधिकारी को रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेगा जिससे रजिस्ट्रीकरण का विवरण उस में प्रवेश किया जाए

4. कोई ऐसी प्रविष्टि करने वाले मूल रजिस्ट्री करता प्राधिकारी के अतिरिक्त कोई अन्य रजिस्ट्री करता प्राधिकारी प्रवृति के विवरण की सन सूचना मूल रजिस्ट्री करता प्राधिकारी को देगा

5. उप धारा 1 2 3 और 4 के अधीन किए गए प्रावधानों के अधीन कोई व्यक्ति जो अवक्रय करार के अधीन यान को धारण करता है, रजिस्ट्री कृत स्वामी की लिखित सहमति के सिवाय यान में कोई परिवर्तन नहीं करेगा

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजन के लिए परिवर्तन से यान की संरचना में परिवर्तन है जिसका परिणाम उसके मूल लक्षण में परिवर्तन में होता है


सोमवार, 30 अगस्त 2021

झूठी f.i.r. कैसे खत्म करवा सकते हैं CrPC 482

इस लेख में आप जाने में भी झूठी f.i.r. को आप कैसे खत्म करवा सकते हैं कई बार आपने देखा होगा कि कई लोग झूठी f.i.r. करके फसा देते हैं या कोई क्राइम हो जाने पर उनके साथ मारपीट या अन्य अपराध होने पर वह ऐसे व्यक्ति को फंसा देते हैं जिससे उनकी दुश्मनी होती है तो आज आप इस लेख में यही जानेंगे कि आप ऐसी f.i.r. जो कि फर्जी है या आपको गलत तरीके से फंसाया गया है तो आप उसे खारिज कैसे करवा सकते हैं

जब भी कोई व्यक्ति आपके नाम से झूठी f.i.r. करवाता है या उसके साथ कोई संघीय अपराध होता है जिसमें आप शामिल नहीं हो और वह फिर भी आपके नाम f.i.r. करवाता है तो ऐसी कंडीशन में आप एफआईआर को खारिज करवा सकते हैं उसके दो तरीके हैं

1. सबसे पहले तो आप के नाम जब झूठी f.i.r. होती है तो जिस थाने में आपकी f.i.r. हुई और जो भी आपका इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर है उसके पास आप अपने दोस्त या अपने पिता किसी भी रिश्तेदार के द्वारा आप अपनी बेगुनाही का  सबूत वीडियो रिकॉर्डिंग या अन्य कोई सबूत उस इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर को दे सकते हैं जिससे उसे जांच करने में आसानी होगी और आपके बेगुनाही के सबूत मिलने पर आपके नाम f.i.r. रद्द की जा सकती है

यदि आपको लगता है कि इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर गलत तरीके से जांच कर रहा है उसने दूसरे पक्ष से रिश्वत ले ली है तो आप अपने क्षेत्र के CO के पास प्रमाणित एफ आई आर की कॉपी ले जा सकते हैं वहां पर अपने दोस्त या रिश्तेदार के द्वारा सीओ के यहां अपने बेगुनाही के सबूत दे सकते हैं

अगर आपको लगता है कि वो भी उनसे मिला हुआ है और CO भी आप की नहीं सुनता है तो आप एफ आई आर की प्रमाणित प्रति लेकर अपने जिले के SP को प्रार्थना पत्र लिख सकते हैं कि आपकी f.i.r. में इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर बदला जाए या आप अपने बेगुनाही के सबूत अपने दोस्त या रिश्तेदार के द्वारा SP  को भिजवा सकते हैं जिससे आपकी f.i.r. रद्द की जा सकती है


अगर फिर भी आपकी f.i.r. रद्द नहीं होती है कोई भी पुलिस ऑफिसर CO ,SP आपकी f.i.r. रद्द नहीं करते हैं आपको लगता है यह भी उनसे मिले हुए हैं या उन्होंने रिश्वत ले लिया है तो आप दंड प्रक्रिया की धारा 482 के अंतर्गत आप हाई Petition filed कर सकते हैं और वहां से अपनी बेगुनाही के सबूत दे कर झूठी FIR  quash को खारिज करवा सकते हैं


दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के अधीन हाई कोर्ट को यह अधिकार है कि वह झूठी एफआईआर को रद्द कर सकता है इसके बाद आप. आईपीसी की धारा भारतीय दंड संहिता की धारा 211 और 500 के अधीन आप झूठी एफआईआर करने वाले व्यक्ति पर भी मुकदमा केस कर सकते हैं


रविवार, 15 अगस्त 2021

Anticipatory bail 438 अग्रिम जमानत

438 गिरफ्तार की आशंका करने वाले व्यक्ति की जमानत मंजूर करने के लिए निर्देश 

जब किसी व्यक्ति को यह विश्वास हो जाए कि उसको किसी अजमानती अपराध के किए जाने के अभियोग में गिरफ्तार किया जा सकता है तो वह इस धारा के अधीन निर्देश के लिए उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय को आवेदन कर सकता है की ऐसी गिरफ्तारी की स्थिति में उसको जमानत पर छोड़ दिया जाए और उच्च न्यायालय अन्य बातों के साथ ध्यान में रखते हुए उसे ऐसी बेल मंजूर करेगा

1. अभियोग की प्रकृति और गंभीरता

2. जो आवेदक है उसने पहले किसी संज्ञेय गंभीर अपराध के लिए न्यायालय द्वारा सजा तो नहीं काटी है

3. क्या आवेदक न्याय से भागने की भविष्य में कोशिश तो नहीं करेगा

4. जहां आवेदक द्वारा उसे इस प्रकार गिरफ्तार करा कर क्षति कराने या अपमान करने के उद्देश्य उस पर अभियोग लगाया गया हो
धारा 438 इस संबंध में यह अनुचिंतित करती है कि किसी गैर जमानती अपराध के होने पर व्यक्ति की आशंका में कोई व्यक्ति एक आवेदन करेगा और इस धारा का उद्देश्य इस तरह के किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी से मुक्ति प्रदान करना है और यह तब मंजूर किया जाता है कि जब न्यायालय का अन्यथा यह समाधान हो जाता है कि अब जमानत मंजूर कर दिया गया तो उसकी आजादी के दुरुपयोग की कोई संभावना नहीं होती है, क्योंकि वह ना तो फरार होगा और ना ही विधि की सम्यक प्रक्रिया से बचने का ऐसा कोई कदम उठाएगा इस तरह अग्रिम जमानत के उपबंध से युक्त उक्त धारा तीन 438 उन व्यक्तियों के संबंध में परिवर्तन ही नहीं है जो संज्ञेय अपराधों के लिए गिरफ्तारी के बाद पहले से ही कारागार के भीतर हैं

इस रूप में धारा 438 का उद्देश्य गिरफ्तारी की आशंका करने वाले व्यक्ति की अग्रिम जमानत का उपबंध करना है और ऐसी जमानत मंजूर करने के लिए निर्देश देने के निमित्त उच्च न्यायालय क्या सेशन न्यायालय को सशक्त करना है इस धारा का प्रवर्तन तब प्रारंभ होता है जब किसी व्यक्ति को इस बात का विश्वास हो जाए कि उसको किसी जमानती अपराध के अभियोग में गिरफ्तार कर लिया जाएगा इस तरह आशंकित व्यक्ति के पास अपने इस विश्वास का पर्याप्त कारण होना चाहिए इस आशंकित व्यक्ति के आवेदन पर सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय अपने विवेक से यह निर्देश दे सकता है कि इस तरह गिरफ्तार किए जाने पर उस व्यक्ति को जमानत पर छोड़ दिया जाए उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय अग्रिम जमानत मंजूर करने का निर्देश देते समय अपने विवेक से कुछ शर्ते अथवा कुछ निम्न प्रकार की शर्तों को भी उस निर्देश में शामिल कर सकता है


1. यह की जमानत पर छोड़े जाने वाले व्यक्ति पुलिस अधिकारी के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए उपलब्ध रहेगा

2. यह कि ऐसा व्यक्ति किसी भी ऐसे व्यक्ति को जो उसके मामले के तथ्यों से अवगत हो न्यायालय या पुलिस अधिकारी के समक्ष ऐसे तथ्य को प्रकट न करने के लिए कोई उत्प्रेरण धमकी या वचन नहीं देगा

3. यह एक ऐसा व्यक्ति न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेगा

4. ऐसी अन्य शर्तें जो धारा 437 3 के अधीन इस प्रकार निरूपित की जा सकती है मानव धारा के अधीन जमानत मंजूर की गई हो

शनिवार, 14 अगस्त 2021

दाखिल खारिज पर आपत्ति लिखना सीखे प्रारूप

न्यायालय श्रीमान तहसीलदार ......जिला..... 

वाद संख्या......                                       वर्ष..... 

आपत्ती द्वारा....... पुत्र......... निवासी....... तहसील......
जिला......... विरुद्ध अंतरण रिपोर्ट


1. अंतरण रिपोर्ट द्वारा प्रार्थी गलत तथ्यों पर आधारित है तथा विधिक प्रक्रिया के विपरीत निरस्त होने योग्य है

2. यह के विवादित भूमि में अंकित काश्तकार..... जो प्रार्थी के पिता थे

3. यह कि प्रार्थी के पिता अपनी मृत्यु के 1 माह पूर्व से बीमार थी तथा मृत्यु के 15 दिन पूर्व तक उनके सोचने समझने की शक्ति भी जा चुकी थी इसी बीच वह प्रार्थी के साथ घर पर ही रहे घर के अलावा कहीं नहीं गए

4. यह है कि आवेदक ने इसी माध्यम मेरे पिता के स्थान पर किसी अन्य को उपनिबंधक कार्यालय में प्रस्तुत कर तथा किसी अन्य व्यक्ति को फोटो लगाकर फर्जी बैनामा करा लिया है तथाकथित बैनामा पर लगा फोटो मेरे पिता का नहीं है

5. यह है कि बैनामा में जो गवाह है वह क्रेता के रिश्तेदार हैं जिस ने मिलकर उक्त फर्जी बैनामा करवाया गया है जिन्होंने अपराधिक कृत्य किया है इस संबंध में आपराधिक कार्रवाई की जा रही है

6. यह कि गांव में घोषणा पत्र पहुंचने पर प्रार्थी को ज्ञात हुआ तब प्रार्थी ने बैनामा की नकल प्राप्त कर दीवानी न्यायालय से उसे नृत्य करने का वाद दायर कर दिया है जो न्यायालय में विचाराधीन है

7. यह कि उक्त कथित बैनामा पूर्णतया लिए वह फर्जी दस्तावेज है उससे आवेदक को कोई हक प्राप्त नहीं होता समस्त प्रक्रिया झूठ पर आधारित है

8. यह के विवादित भूमि पर अपने पिता के समय से ही काबिल चला आ रहा है तथा आज भी कागज है इस पर कथित क्रेता का कभी कोई कब्जा नहीं हुआ

अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि नामांतरण सूचना सूचना निरस्त करने की कृपा करें

दिनांक....                                        आपत्ति करता
                                                     हस्ताक्षर....

सोमवार, 9 अगस्त 2021

उत्तराधिकार दाखिल खारिज रुकवाने के लिए प्रार्थना पत्र आपत्ति कैसे लगाएं

आपत्ती नामांतरण प्रार्थना पत्र

न्यायालय श्रीमान तहसीलदार .........जनपद........

वाद संख्या......                               वर्ष....... 



                      ............ बनाम............
आपत्ती द्वारा.......... पुत्र........... निवासी...........
तहसील................. जिला............ विरुद्ध नामांतरण सूचना


1. यह के नामांतरण पर सूचना द्वारा वादी गलत तथ्यों पर आधारित है विधि के प्रावधानों के विपरीत है निरस्त होने योग्य है

2. यह के आवेदन कर्ता ने मृतक की विधवा के रूप में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है परंतु मृतक की मृत्यु दिनांक.....
को हो जाने के बाद उसने............... पुत्र........... निवासी..
से दिनांक..... को पुन्र विवाह कर लिया है इस कारण उसके सारे अधिकार व हैसियत विधवा समाप्त हो गए हैं

3. यह की पुनर्विवाह करने के उपरांत वह अपने पति के साथ ग्राम...... में रह रही है तथा दोनों ही पति-पत्नी के रूप में जीवन व्यतीत कर रहे हैं


4. यह के आवेदन कर्ता का नाम ग्राम की वोटर सूची तथा परिवार रजिस्टर में भी बहस यत पत्नी पुनर्विवाह पति दर्ज है


6. यह के आपत्ति करता मृतक का सगा भाई है मृतक के कोई पुत्र या पुत्री अथवा विधवा मां नहीं है प्रार्थी आपत्ति करता ही मृतक का एकमात्र वारिस है

7. यह के विवादित भूमि पर मृतक की मृत्यु के उपरांत आपत्ति करता का ही कब्जा चला रहा है आवेदक का विवादित भूमि पर कभी कोई कब्जा नहीं रहा

अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि नामांतरण पर सूचना निरस्त करा पत्र कर्ता का नाम मृतक के स्थान पर दर्ज किया जावे


दिनांक.....                                आपत्ति करता हस्ताक्षर

रविवार, 8 अगस्त 2021

उत्तराधिकार मामले में प्रार्थना पत्र राजस्व निरीक्षक को

किसी खातेदार की मृत्यु पर उत्तराधिकार पाने वाला व्यक्ति कब्जा प्राप्त कर अपनी रिपोर्ट प्रपत्र पर राजस्व निरीक्षक को देगा यदि उत्तराधिकार विवादित है उस पर कोई विवाद नहीं है तो राजस्व निरीक्षक मृतक के स्थान पर उत्तराधिकारी का नाम अधिकार अभिलेख में दर्ज करेगा और यदि उत्तराधिकार विवादित है तो वह उचित जांच कर अपनी रिपोर्ट तहसीलदार को देगा यदि कोई व्यक्ति राजस्व निरीक्षक के आदेश से व्यथित हो अथवा राजस्व निरीक्षक के उसका नाम दर्ज न किया हो तो वह तहसीलदार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकता है इस धारा का उपबंध प्रत्येक खातेदार पर लागू होगा उत्तराधिकार के मामले में रिपोर्ट करने पर कोई स्टांप शुल्क दे नहीं होगा


प्रार्थना पत्र राजस्व निरीक्षक को
धारा 371 नियम 29(1)राजस्व संहिता

सेवा में,
           श्रीमान राजस्व निरीक्षक
           क्षेत्र........
           तहसील. ....... जनपद........

राजस्व संहिता की धारा 33(1) के अंतर्गत उत्तराधिकार हेतु रिपोर्ट

1. आवेदक का नाम.... पिता का नाम... और पता...
2. भूमि का विवरण है जिसके संबंध में रिपोर्ट की जा रही है
      ग्राम .....गाटा नंबर...... रकबा.....
3. मृतक व्यक्ति का नाम........... मृत्यु तिथि .......पिता का       नाम ........ पता.........
4. आवेदक का मृतक से संबंध.........
5. क्या आवेदक एकमात्र उत्तराधिकारी है?  यदि नहीं तो          दूसरे उत्तराधिकारी के नाम और पता........ 

6. क्या उत्तराधिकार वसीयत पर आधारित है यदि हां तो वसीयत की प्रति संलग्न करें

दिनांक.....                                  आवेदक के हस्ताक्षर

शनिवार, 31 जुलाई 2021

whate is mutation दाखिल खारिज क्या है

दाखिल खारिज क्या है ?

 शाब्दिक रूप से , शब्द " दाखिल खारिज करना ' का तात्पर्य " परिवर्तन करने से है । जब काश्तकार की ओर से मृत्यु , उत्तराधिकार या अन्तरण के कारण राजस्व अभिलेखों में विद्यमान प्रवृत्तियाँ त्रुटिपूर्ण या व्यर्थ हो जाती हैं , तब कलेक्टर से उन्हें शुद्ध करने की अपेक्षा की जाती है , जिससे भू - राजस्व से अबाध प्रवाह को सुगम बनाया जा सके । ऐसा शुद्धीकरण या तो उत्तराधिकार या अन्तरण के आधार पर कब्जा प्राप्त करने वाले व्यक्ति की रिपोर्ट पर या राजस्व प्राधिकारियों के ज्ञान में अन्यथा आने वाले तथ्यों के आधार पर किये जाते हैं । हिन्दी का समान शब्द दाखिल खारिज भी वही विचार व्यक्त करता है , क्योंकि किसी के नाम का विलोपन किया जाता है और अन्य व्यक्ति के नाम को प्रविष्ट किया जाता है । इस प्रकार , दाखिल खारिज एक विधिक प्रक्रिया है , जिसके माध्यम से अधिकार अभिलेख में प्रविष्टियाँ उत्तराधिकार या अन्तरण के आधार पर परिवर्तित की जाती हैं । जब राजस्व अभिलेखों को उ.प्र.राजस्व संहिता की धारा 32 या धारा 38 के अधीन शुद्ध किये जाने की अपेक्षा की जाती है , तब ऐसा परिवर्तन भी उक्त संहिता के अध्याय 5 के प्रयोजनों के लिए शब्द " दाखिल खारिज " द्वारा ही आच्छादित माना जाता है । दाखिल खारिज और शुद्धीकरण के बीच पर्याप्त अन्तर है । प्रत्येक दाखिल खारिज शुद्धीकरण की परिधि में आता है , किन्तु प्रत्येक शुद्धीकरण को दाखिल खारिज की संज्ञा प्रदान नहीं की जा सकती है

बुधवार, 28 जुलाई 2021

वसीयत की रजिस्ट्री किया जाना अनिवार्य है

इस लेख में वसीयत से जुड़ी बहुत ही महत्वपूर्ण बात करेंगे  वसीयत की रजिस्ट्री कराना अनिवार्य है या नहीं अगर आप वसीयत करवाते हैं तो आपको रजिस्ट्री करवाना चाहिए या नहीं करवाना चाहिए और यदि आप रजिस्ट्री नहीं करवाते हैं तो आगे क्या होगा क्या आप की वसीयत अमान्य होगी

भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 के अनुसार वसीयत का रजिस्ट्रीकरण जरूरी नहीं है. पर इसके कारण कई लोग इस सुविधा का दुरुपयोग करते हैं और उनके द्वारा किया जा रहा था और यह प्रावधान किया गया कि जमीदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 169 में निर्दिष्ट सभी वसीयतो  को आवश्यक रूप से रजिस्ट्री किया जाएगा
 इसके बाद जब उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता UPRC 2006 कानून बना था उसमें भी  धारा 107 में भी यह जारी रखा गया अतः वहां पर प्रावधान किया गया है यह स्पष्ट निर्विवादित रूप से कहां जा सकता है की  भूमि का स्वामी के संबंध में प्रत्येक वसीयत रजिस्ट्री की जानी चाहिए और गैर रजिस्ट्री कृत वसीयत अवैध अर्थातअमान्य गैरकानूनी होगी

यदि राजस्व अधिकारी रजिस्ट्री कृत वसीयत के आधार पर दाखिल खारिज मंजूर करता है तो उसका आदेश न केवल शून्य होगा बल्कि वह विभागीय कार्रवाई के अधीन भी हो सकता है

अतः स्पष्ट शब्दों में कह सकते हैं कि आप कभी भी वसीयत कर आते हैं तो बिना रजिस्ट्री किए वसीयत ना कराएं वरना उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 107 उप धारा 3 का उल्लंघन होगा और ऐसी वसीयत  अमान्य मानी जाएगी

अजय प्रकाश दीक्षित बनाम उत्तर प्रदेश राज्य 2004(96)आर.डी.298 : 2004
ए डब्ल्यू सी 11718 ‍‍(एच.सी)

गुरुवार, 22 जुलाई 2021

General power of attorney आम मुख्तारनामा Special power of attorney खास मुख्तारनामा नामा

इस लेख में आप जानेंगे पावर ऑफ अटॉर्नी  मुख्तारनामा क्या होती है और यह कितने प्रकार की होती है आपको उसकी जरूरत कब पड़ती है कब आपको पावर ऑफ अटॉर्नी करवानी चाहिए और कब पावर अटॉर्नी कैंसिल की जा सकती है
 पहले आपको बता दें कि पावर ऑफ अटॉर्नी को मुख्तारनामा भी कहते हैं पावर ऑफ अटॉर्नी 1882 sec 1 कहता है कि पावर ऑफ अटॉर्नी instrument वह लेख पत्र है जिसके द्वारा एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को कोई भी कार्य करने के लिए दूसरे व्यक्ति को अधिकार दे सकता है 

पावर ऑफ अटॉर्नी 1882 का सेक्शन 2 यह कहता है कि अगर कोई भी व्यक्ति जिसे प्रतिनिधि बनाया गया है वह कोई भी कार्य करता है तो ऐसा माना जाएगा कि वह उसी व्यक्ति द्वारा कार्य किया गया है जो संपत्ति का असली स्वामी है

- पावर ऑफ अटॉर्नी वह व्यक्ति दे सकता है- जो संपत्ति का वास्तविक स्वामी हो जो वयस्क हो जो मानसिक रूप से स्वस्थ हो वह व्यक्ति पावर ऑफ अटॉर्नी दे सकता है

पावर ऑफ अटॉर्नी किसकी फेवर में दी जा सकती है- पावर ऑफ अटॉर्नी ऐसे व्यक्ति की फेवर में दी जा सकती है जो व्यस्क हो जो दिमाग से स्वस्थ हो जो कोर्ट से अयोग्य घोषित न किया गया हो

पावर ऑफ अटॉर्नी कब दी जा सकती है कोई भी संपत्ति का स्वामी अगर वह व्यक्ति विदेश में रहता है या अपनी संपत्ति से दूर रहता है जहां उसे आने जाने में कानूनी कार्रवाई न्यायालय कार्रवाई के लिए आने में दिक्कत होती है या कोई ऐसा स्वामी जो वृद्धा अवस्था में है या कोई ऐसा स्वामी जो बीमार है वह व्यक्ति किसी को भी जिस पर वह विश्वास करें उसे पावर ऑफ अटॉर्नी उसके फेवर में दे सकता है
अगर कोई बड़ा बिजनेसमैन है जिसे अपनी संपत्ति की कानूनी कार्रवाई या न्यायालय कार्रवाई करने के लिए समय नहीं मिलता वह व्यक्ति भी दूसरी किसी व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी दे सकता है

पावर ऑफ अटॉर्नी के प्रकार-

 General power of attorney आम मुख्तारनामा
 Special power of attorney खास  मुख्तारनामा

जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी यह उस कंडीशन में दी जाती है जब किसी व्यक्ति को कई अधिकार दिए जाते हैं जैसे संपत्ति बेचने का अधिकार कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार उसको 143 में परिवर्तन कराने का अधिकार तो ऐसी स्थिति में जनरल पावर अटॉर्नी की जाती है

स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी - स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी के अनुसार किसी एक विशेष अधिकार के लिए किसी व्यक्ति को प्रतिनिधि के रूप में चुना जाता है जैसे सिर्फ और सिर्फ कानूनी कार्रवाई करने के अधिकार स्पेशल पावर करने में अन्य अधिकार नहीं मिलते

पावर ऑफ अटॉर्नी कब कैंसिल की जा सकती ह

सबसे पहले पावर ऑफ अटॉर्नी अगर आप कैंसिल करवाना चाहते हैं तो कैंसिल की जा सकती है पावर ऑफ अटॉर्नी कैंसिल कराने के लिए आपको उस व्यक्ति को नोटिस देना होगा जिस व्यक्ति को आपने पावर ऑफ अटॉर्नी की थ

यदि आपने पावर ऑफ अटॉर्नी की रजिस्ट्री करवाई है तो आप रजिस्ट्री ऑफिस में भी आप एप्लीकेशन दे सकते हैं उसमें मेंशन कर सकते हैं कि इस व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी खारिज की जाती है या आप सार्वजनिक किसी अखबार में यह बात करवा सकते हैं कि इस व्यक्ति को दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी कैंसिल की जाती है

पावर ऑफ अटॉर्नी कब कैंसिल हो जाती है कब निरस्त हो जाती है

1. यदि संपत्ति के असली मालिक की मृत्यु हो जाए उस कंडीशन में या जिस व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी दी है उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाए उस कंडीशन में या जिस कार्य के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी की थी वह कार्य पूरा हो जाने पर पावर ऑफ अटॉर्नी निरस्त हो जाती है

यदि किसी निश्चित समय तक के लिए थी तो उस समय होने के बाद पावर ऑफ अटॉर्नी कैंसिल हो जाती है





रविवार, 18 जुलाई 2021

दंड प्रक्रिया की संहिता धारा 43

इस लेख में आप जानेंगे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 43 के बारे में जैसा कि आप लोगों को सभी लोगों को पता होगा कि जब भी कोई अपराधी जब भी कोई व्यक्ति अपराध करता है तो ऐसी स्थिति में पुलिस को उस व्यक्ति को जिसने अपराध किया है उसे गिरफ्तार करने का अधिकार होता है और पुलिस ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर लेती है

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण आप जान ले कि सीआरपीसी भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता 43  प्रावधान करती है कि आम व्यक्तियों को भी संज्ञेय गंभीर अपराध करने वाले व्यक्ति अपराधी की गिरफ्तारी करने का अधिकार है और ऐसे व्यक्ति को अपराधी को गिरफ्तार करके पुलिस को सौंप सकती है तो आज दोस्तों आज इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे सीआरपीसी 43 के प्रावधानों के बारे में

CrPC 43 - प्राइवेट व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी और ऐसी गिरफ्तारी पर प्रक्रिया- कोई प्राइवेट व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को जो उसकी उपस्थिति में उसके सामने अजमानतीय  संज्ञेय गंभीर किस्म का अपराध करता है या किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है जिस पर इनाम या जिसे अपराधी घोषित कर दिया गया है ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है और ऐसे गिरफ्तार किए व्यक्ति को बिना अनावश्यक देरी के पुलिस अधिकारी के हवाले कर सकता है या निकटतम पुलिस थाने मैं भिजवा सकता Ko

गिरफ्तार किया गया ऐसा व्यक्ति जो पुलिस अधिकारी के पास है थाने में ले जाया जाएगा तब पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति को स्वयं गिरफ्तार करेगा परंतु यह गिरफ्तारी तब होगी जब उसके पास यह विश्वास करने के कारण हो कि उसने कोई संज्ञेय अपराध किया है यह गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति ने कोई असंज्ञेय अपराध किया है और पूछने पर वह अपना नाम व पता नहीं बताता है तो ऐसी अवस्था में उस अधिकारी को जब तक उसका नाम व पता सही नहीं मिल जाता है उसे गिरफ्तार करने का अधिकार होगा लेकिन अगर उसने कोई अपराध नहीं किया है तो उसे तुरंत शीघ्र ही छोड़ दिया जाएगा



शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

CRPC 151

आज के लेख में बात करेंगे Crpc दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के प्रावधानों के बारे में


जैसा कि आपने कई बार देखा होगा कि जब भी दो पक्ष आपस में लड़ते हैं या कहीं भी मारपीट होती है तो अगर कोई पुलिस को फोन करता है तो पुलिस आकर उन दोनों पक्ष को या उन दोनों व्यक्तियों को जो आपस में लड़ रहे थे उन्हें गिरफ्तार कर लेती है चाहे वह लड़ाई मामूली ही क्यों ना हो क्या आपने कभी सोचा है कि यह अधिकार पुलिस को कहां से मिलता है और पुलिस क्यों गिरफ्तार कर लेती है क्या यह अवैध है वही इस लेख में जानेंगे


Crpc151 के प्रावधान - संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए गिरफ्तारी सीआरपीसी 151 है प्रावधान करती है कि कोई पुलिस अधिकारी जिसे किसी संज्ञेय एक गंभीर अपराध होने की संभावना परिकल्पना का पता चलता है तो ऐसी स्थिति में जो व्यक्ति गंभीर अपराध करने वाला है उसे मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है
जिससे संज्ञेय गंभीर अपराधों को होने से रोका जा सके यहां पर संज्ञेय अपराधों का मतलब ऐसे अपराधों से हैं जो गंभीर किस्म के अपराध हैं और जिन्हें करने पर 3 वर्ष या 3 वर्ष से अधिक का कारावास हो सकता है वह संघीय अपराध कहलाते हैं ऐसी स्थिति में पुलिस को यह अधिकार है इस संधि अपराध करने वाले को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है संघीय अपराध में गिरफ्तार बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार पुलिस को इसलिए है क्योंकि अगर पुलिस किसी मजिस्ट्रेट से आदेश ले गई तब तक वह क्राइम हो चुका होगा इसलिए ऐसे अपराधों को रोकने के लिए बिना वारंट के भी पुलिस गिरफ्तार कर सकती है

इस धारा के अधीन गिरफ्तार व्यक्तियों को उसकी गिरफ्तारी के समय से 24 घंटे की अवधि से अधिक उसे गिरफ्तार करके नहीं रखा जा सकता है 24 घंटे के भीतर उस व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और गिरफ्तारी के तत्काल बाद उसकी गिरफ्तारी के आधारों को बतलाया जाएगा

महत्वपूर्ण बात यह भी है कि कई बार इस धारा के अधीन गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को अगर मामूली विवाद था या उसने कोई अपराध नहीं कर पाया है और किसी ने शिकायत नहीं की है तो ऐसी स्थिति में ऐसे व्यक्ति को पुलिस कुछ देर तक थाने में बंद रखती है उसके बाद छोड़ दिया जाता है जैसी कई बार आपने देखा होगा कि चुनाव के समय कई लोगों को कुछ देर के लिए गिरफ्तार कर लिया जाता है और कुछ देर पश्चात है उतना खत्म होने के पश्चात आना छोड़ दिया जाता है



लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है किस धारा का उपयोग पुलिस द्वारा कभी-कभी गलत रूप से भी किया जाता है कई बार पुलिस छोटे-छोटे मामलों में भी पैसों के लिए व्यक्तियों को गिरफ्तार करती है और पैसे लिए जाने के बाद उन्हें छोड़ देती है कई बार आपने देखा होगा कि दो लोग आपस में बहस भी कर रहे हैं और किसी ने 100 नंबर पर कॉल कर दी पुलिस आगे उन दोनों लोगों को गिरफ्तार कर लेती है और सर कुछ पैसे लेकर उन्हें वापस से छोड़ देती है जो कि बिल्कुल गलत है जबकि है धारा सिर्फ और सिर्फ गंभीर अपराधों को करने से रोकने के लिए प्रधान करती है जिससे समाज में गंभीर संघीय अपराध होने से रोका जा सके


विकास प्राधिकरण अप्रूव्ड कॉलोनी प्लाटिंग कौन सी होती है और फ्री होल्ड कॉलोनी जमीन कौन सी होती है

1 - D A  एप्रूव्ड ( डी ए से स्वीकृत)  वह जमीन जो विकाश प्राधिकरण किसानों से खरीद कर स्वयं या किसी बड़े बिल्डर से शहरी आवासीय योजना के मानको क...