शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021

आईपीसी धारा 420, 417 में अंतर

इस लेख में आसान और शार्ट में जानेंगे कि आईपीसी की धारा 420 और 417 में क्या अंतर होता है



सबसे पहले समझते हैं आईपीसी की धारा 420 को
IPC की धारा 420 के अनुसार छल करना और संपत्ति प्ररिदत्त (प्राप्त )करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करना 

उदाहरण अ,नाम का व्यक्ति ब,नाम के व्यक्ति को जानकर नकली कांच के हीरे दिखाकर बोलता है
 यह असली हीरे हैं इन्हें खरीद लो और ब,व्यक्ति उन हीरो को असली समझ कर खरीद लेता है और उन नकली कांच के हीरो के बदले में चार सोने के सिक्के दे देता है   यहां पर 4 सिक्के के सोने के रूप में संपत्ति प्ररिदत्त हुई है और इस स्थिति में अ,व्यक्ति आईपीसी की धारा 420 के अधीन दोषी होगा और उसे 7 वर्ष के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है

1. इस धारा में संपत्ति प्रदत्त होना जरूरी है
2. इस धारा में 7 वर्ष और जुर्माने का कारावास है
3. आईपीसी की धारा 420 किया गया अपराध संघेय अपराध की श्रेणी में आता है

  IPC 417 छल के लिए दंड - IPC की धारा 417 के अनुसार जो व्यक्ति छल करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास जिसकी अवधि 1 वर्ष तक की या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जा सकता है

 उदाहरण अ,नाम का व्यक्ति ब,नाम के व्यक्ति को जानकर नकली कांच के हीरे दिखाकर बोलता है
 यह असली हीरे हैं इन्हें खरीद लो और ब,व्यक्ति उन हीरो को असली समझ कर खरीद लेता है और बाद मे समझ लेता है कि यह नकली है और अ,व्यक्ति को बदले में कोई भी संपत्ति नहीं देता है  इस उदाहरण में संपत्ति प्रदत्त नहीं हुई है इसलिए अ,व्यक्ति आईपीसी की धारा 417 के अधीन दोषी होगा जिसे 1 वर्ष के कारावास या जुर्माने से दंडित किया जा सकता है

1  इस धारा में संपत्ति प्ररिदत्त नहीं होती है
2. इस धारा में 1 वर्ष के कारावास और जुर्माने से दंडित करने का प्रावधान है
3. इस धारा के अधीन किया गया अपराध असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है

यदि आपको और भी जानकारी चाहिए तो आप मुझे इंस्टाग्राम पर फॉलो कर सकते इंस्टाग्राम यूजरनेम दिया गया है  प्रश्न पूछ सकते हैं

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शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

IPC - 420 IPC - 417 छल, बेईमानी कब होता है और कितनी सजा है

इस लेख में सरल भाषा में आप जानेगे IPC 420
 किन दशाओं में लगती है  IPC 417 और इस धारा के अधीन अपराध करने पर कितने वर्ष की सजा कारावास है




IPC 420 छल करना और संपत्ति प्ररिदत्त ( प्राप्त) करने के लिए बेईमानी से किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करेगा-  वह इस धारा के अधीन अपराध करता है तो उस व्यक्ति को 7 साल तक का कारावास और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है


लेकिन दोस्तों आपको 420 के साथ-साथ IPC 417-छल के लिए दंड भी समझना बहुत जरूरी  है

  सरल भाषा में स्पष्टीकरण

इस धारा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के साथ इस प्रकार से छल करता है कि वह व्यक्ति अपनी संपत्ति उस व्यक्ति को दे दे , और उस छल से यदि संपत्ति प्राप्त लेता है तो वह आईपीसी की धारा 420 के अधीन दोषी होगा

  उदाहरण-1  यदि आप सोना खरीदने जाते हैं और कोई भी व्यक्ति आपको नकली सोने के जेवरो को असली सोने के जेवर बता कर आपको वह जेवर असली सोने की कीमत पर दे देता है ,और आपसे असली सोने की कीमत के पैसे प्राप्त कर लेता है ( संपत्ति की कीमत कुछ भी हो सकती है) तो वह व्यक्ति 420 के अधीन दोषी होगा

 उदाहरण -2 आपने कई बार सुना होगा कि कई बार फ्रॉड कॉल की जाती है और उस कॉल के जरिए आप के ATM का पासवर्ड या आपके ATM की डिटेल मांगी जाती है और डिटेल बता देने पर आपके सभी पैसे
 आपके खाते से उड़ा दिए जाते हैं तो यह अपराध भी 420 की श्रेणी में आता है 

 लेकिन अब दोस्तों सबसे जरूरी बात यह है कि अगर किसी व्यक्ति ने आपको फ्रॉड कॉल की और आपसे बैंक ATM की डिटेल मांगी गई  लेकिन यदि मान लीजिए वहां पर किसी तरह  संपत्ति प्ररिदत्त नहीं हुई है यानी कि आपका पैसा बेईमानी करने वाले ने नहीं चुरा पाया है नहीं ले पाया है तो वहां पर उस व्यक्ति को आईपीसी की धारा 417 के अधीन दोषी होगा 

IPC - 417 का सरल शब्दों में स्पष्टीकरण

अगर मान लीजिए आपके साथ किसी व्यक्ति ने फ्रॉड किया है छल किया है और वह व्यक्ति आपसे संपत्ति नहीं ले जा पाया है तो उस दशा में आईपीसी की धारा 417 लगेगी और 1 वर्ष का कारावास होगा

लेकिन अगर किसी व्यक्ति ने आपके साथ फ्रॉड किया है और उस फ्रॉड से आपकी संपत्ति भी उसने उसके पास पहुंच गई उसने संपत्ति आपकी ले लिए तो वहां पर वह व्यक्ति IPC 420 के अधीन दोषी होगा और 7 वर्ष का कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा


दोस्तों यदि आपका कोई प्रश्न है तो आप मुझे इंस्टाग्राम पर पूछ सकते हैं इंस्टाग्राम यूजरनेम दिया गया है 

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मंगलवार, 6 अप्रैल 2021

दृढ़ संकल्प और अपने मन इंद्रियों को स्थिर कर जीवन में सही निर्णय लेना सीखे


 दोस्तों अक्सर हमारे जीवन में कुछ गलतियां हम से ऐसी हो जाती है जो हम न चाहकर भी और यह जानकर कि हां यह गलती है ऐसे नहीं करना चाहिए और हम कर बैठते हैं  उसकी मुख्य वजह होती है कि हम अपनी इंद्रियों को काबू में नहीं कर पाते हैं और आप एक बात जान ले कि हमारी इंद्रियां इतनी  वेगवान होती है इतनी ताकतवर होती है कि वे एक विवेक समझदार पुरुष और ज्ञानी पुरुष के मन को भी बलपूर्वक हर लेते हैं और हम गलती कर बैठते हैं या हम यह जानकर भी कि मैं जो कर रहा हूं गलत कर रहा हूं और फिर भी वह गलती कर बैठते हैं    

चलिए जान लेते हैं हम अपनी इंद्रियों को मन कैसे वश में करें कैसे गलती करने से बचें 

 उदाहरण- कई बार आपने देखा होगा जिन लोगों को डायबिटीज होती है जो शुगर के मरीज होते हैं और जब घर में मिठाइयां बनती है तो वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाते वह यह जानकर भी कि मिठाई मुझे नुकसान करेगी फिर भी वह खाते हैं क्योंकि वह अपनी इंद्रियों पर काबू नहीं कर पा रहे हैं इसका परिणाम उन्हें यह मिलता है कि उन्हें वह मिठाई नुकसान ही करती है


सिगरेट पीने वाले लोग वह जानते हैं कि धूम्रपान से कैंसर होताा है सिगरेट के डब्बे के ऊपर स्पष्ट रुप से लिखा होता हैै कि धूम्रपान से कैंसर होता है
फिर भी वह लोग अपने आप को सिगरेट पीने से नहीं रोक पाते हैं

 गीता श्लोक के अनुसार




यततो ह्यपि कौन्तेय पुरूषस्य विपश्र्चित:|
इन्द्रियाणि प्रमाथीन हरन्ति प्रसभं मनः ||६०||



 हिंदी अर्थ

श्री कृष्ण भगवान अर्जुन से कहते हैं कि हे अर्जुन ! इंद्रियां इतनी प्रबल तथा वेगवान है कि वे उस विवेक पुरुष के मन को भी बलपूर्वक हर लेती है, जो उन्हें वश में करने का प्रयत्न करता है 

अनेक विद्वान ऋषि  इंद्रियों को वश में करने का प्रयत्न करते हैं किंतु उनमें से बड़े से बड़ा भी कभी-कभी विचलित मन के कारण इंद्रियभोग का लक्ष्य बन जाता है यहां तक कि विश्वामित्र जैसे महर्षि तथा जो पूर्ण रूप से योगी थे वह भी  मेनका के साथ  संभोग में प्रवृत्त होना पड़ा , हालांकि भी इंद्रियनिग्रह के लिए कठिन तपस्या तथा योग कर रहे थे विश्व इतिहास गवाह है इसी तरह की अनेक घटनाएं है इंद्रियों को वश में करना अत्यंत कठिन है | अपने मन को भगवन श्री कृष्ण में लगाए बिना मनुष्य ऐसे भौतिक कार्यों को बंद नहीं कर सकता है

सोमवार, 5 अप्रैल 2021

crpc 60 पुलिस अभिरक्षा से भागने पर पीछा कर पकड़ने की शक्ति

crpc60 (1). यदि किसी व्यक्ति को पुलिस ने विधिपूर्वक गिरफ्तार किया है और वह विधिपूर्वक अभिरक्षा से निकलकर भागता है या किसी व्यक्ति द्वारा छुड़ा लिया जाता है तो वह व्यक्ति जिसकी अभिरक्षा से वह निकल कर भागा है वह पुलिस अधिकारी उसका तुरंत पीछा कर सकता है और भारत के किसी स्थान में उसे गिरफ्तार कर सकता है 

(2). उप धारा 1 के अधीन गिरफ्तारी यों को धारा 47 के उपबंध लागू होंगे , भले ही ऐसी गिरफ्तारी करने वाला व्यक्ति वारंट के अधीन कार्य न कर रहा हो और गिरफ्तारी करने का प्राधिकार रखने वाला पुलिस अधिकारी न हो

पुलिस कब मारपीट (बल प्रयोग) कर सकती है

 इस लेख में आप जानेंगे कि पुलिस को बल प्रयोग कर सकती है कब मारपीट कर सकती है

अधिकतर देखा जाता है कि पुलिस मारपीट या गाली गलौज करने लगती है जो कि पुलिस को किसी भी कानूनी से गाली देने का अधिकार या बिना वजह मारने का अधिकार नहीं होता है और इस लेख में आपको बता दूं कि पुलिस को कब मारपीट करने का अधिकार होता है

 crpc 46 में बताया गया है - कि गिरफ्तारी कैसे की जाएगी सीआरपीसी 46 में यह भी बताया गया है कि पुलिस कितना बल प्रयोग कर सकती है कब किसी व्यक्ति के साथ मारपीट कर सकती है  सीआरपीसी 46 के अनुसार पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर रही है और उस व्यक्ति ने गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की या वह गिरफ्तारी नहीं दे रहा है तो ऐसी स्थिति में पुलिस उस व्यक्ति को मारपीट सकती है उसके लाठी डंडे मार सकती है और  हथकड़ी लगा सकती है इसके  अलावा पुलिस को मारने पीटने का अधिकार किसी भी कानून में नहीं है

लेकिन गिरफ्तारी के दौरान भी मारना पीटना बल प्रयोग करने का अधिकार तभी है जब गिरफ्तार किया जाने वाला व्यक्ति सीधी तरह गिरफ्तारी न दें और वह गिरफ्तारी से बचकर भागे तभी अन्यथा अगर कोई व्यक्ति आसानी से गिरफ्तारी दे रहा है तो वहां पर भी पुलिस को मारने पीटने का अधिकार नहीं है

और दोस्तों अगर यदि आपका कोई क्वेश्चन हो तो आप मुझे इंस्टाग्राम पर पूछ सकते हैं इंस्टाग्राम यूजरनेम

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मंगलवार, 30 मार्च 2021

गिरफ्तारी न देने पर पुलिस को कब गोली मारने का अधिकार है crpc-46

 इस लेख में आप जानेंगे अगर कोई अपराधी व्यक्ति पुलिस की गिरफ्तारी से बचकर भाग रहा है तब पुलिस कब उसके गोली मार सकती है कितना बल प्रयोग कर सकती है




crpc 46 गिरफ्तारी कैसे की जाएगी- उसने बताया गया है कि पुलिस गिरफ्तारी के दौरान कब कितना बल प्रयोग कर सकती है 

यदि कोई ऐसा व्यक्ति जो गिरफ्तार किया जा रहा है और वह बल लगा कर गिरफ्तारी से बचने का प्रयत्न कर रहा है तो ऐसा पुलिस अधिकारी आवश्यक सब साधनों के उपयोग में ला सकता है  आगे भी यह भी बताऊंगा कि कौन-कौन से साधन का प्रयोग कर सकती है पुलिस

 इस धारा की कोई बात ऐसे व्यक्ति की जिस पर मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडित अपराध का अभियोग नहीं है, उसकी मृत्यु कार्य करने का अधिकार नहीं है

 

सरल भाषा में स्पष्टीकरण



गिरफ्तार किया जाने वाला व्यक्ति यदि गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने आप को पुलिस से बलपूर्वक छुड़ाता है या प्रतिरोध करता है या गिरफ्तारी से बचने का प्रयत्न करता है तो इसके लिए पुलिस हर आवश्यक साधन का प्रयोग कर सकती है यानी कि उस व्यक्ति को मारा पीटा जा सकता है उसे असला दिखा कर भयभीत किया जा सकता है उसको हथकड़ी लगाई जा सकती है
लेकिन उस समय केवल आवश्यक बल का प्रयोग ही किया जा सकता है जो कि मामले की स्थिति देखकर स्थिति पर निर्भर करता है 

और यदि पुलिस आवश्यकता से अधिक मारपीट गिरफ्तारी के दौरान करती है आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग करती है तो आप पुलिस के विरुद्ध पुलिस अधिनियम 1861 की धारा 5 के अंतर्गत कार्यवाही कर सकते हैं

गिरफ्तारी के दौरान बल का प्रयोग इतना नहीं किया जा सकता है कि गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति की मृत्यु ही हो जाए लेकिन हां ऐसा उस स्थिति में किया जा सकता है जब गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति पर उस अपराध को करने का आरोप है जिससे उस व्यक्ति को मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडित किया जा सकता है 


अगर आप मुझे कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो आप मुझे इंस्टाग्राम पर पूछ सकते हैं 
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परगना क्या होते हैं परगनाधिकारी कौन होता है

इस लेख में आप जानेंगे कि परगना क्या होता है परगना का क्षेत्र कितना होता है परगना किस में आता है परगनाधिकारी कौन होता है

दोस्तों आपने परगना शब्द अक्सर सुना होगा यदि आप जब भी उत्तर प्रदेश की किसी तहसील में किसी जमीन की रजिस्ट्री कराने जाएंगे तो खासकर वहां पर परगना शब्द का उपयोग किया जाता है 

 दोस्तों जिस प्रकार गांव से मिलकर मौजा बना होता है उसी प्रकार कई मौजों से मिलकर एक परगना बना होता है  और कई परगनाओं को मिलाकर एक तहसील बनती है और कई तहसीलों को मिलाकर एक जिला बनता है
उसी प्रकार कई जिलों को मिलाकर एक कमिश्नरी या (मंडल) बनता है  इसी प्रकार उत्तर प्रदेश 18 कमिश्नरी (मंडलों) में विभाजित है

जब भी आप अपनी रजिस्ट्री करवाने जाते हैं तो वहां पर जो भी आप की जमीन की रजिस्ट्री करवाता है वह पूछता है कि आपका परगना कौन सा पड़ता है  आप की जमीन किस परगने  मैं है  इस प्रकार एक तहसील के अंदर  दो या दो से अधिक परगने हो सकते हैं

सहायक कलेक्टर को परगनाधिकारी भी कहा जा सकता है




सोमवार, 29 मार्च 2021

crpc 46 गिरफ्तारी कैसे की जाएगी

इस लेख में आप  सरल भाषा में जानेगे crpc46  गिरफ्तारी कैसे की जाएगी 



crpc 46  (1)  गिरफ्तार करने में पुलिस अधिकारी जो गिरफ्तार कर रहा है , गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति के शरीर को छुएगा या परिरुद्ध  करेगा , जब तक उसने वचन द्वारा या कर्म द्वारा अपने को पुलिस अभिरक्षा में समर्पित न कर दिया हो 

( परंतु यह कि जहां किसी स्त्री को गिरफ्तार किया जाना है, वहां जब तक परिस्थितियां प्रतिकूल न हों, गिरफ्तारी की मौखिक सूचना पर  अभिरक्षा में उसके समर्पण की उप धारणा की जाएगी तथा जब तक परिस्थितियां अन्यथा अपेक्षा न करें अथवा जब तक पुलिस अधिकारी महिला ना हो, तब तक पुलिस अधिकारी स्त्री की गिरफ्तारी करने के लिए उसके शरीर का स्पर्श नहीं करेगा)

(2). ऐसा व्यक्ति अपने गिरफ्तार किए जाने के प्रयास को रोकता है या गिरफ्तार होने से इनकार करता है या गिरफ्तारी से बचने का प्रयत्न करता है तो पुलिस अधिकारी उसे गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक सभी साधनों या बल का प्रयोग कर सकता है

(3). इस धारा  के अधीन ऐसे व्यक्ति की जिस पर मृत्यु  या आजीवन कारावास से दंडनीय  अपराध का अभियोग नहीं है तब गिरफ्तारी के दौरान इतना बल का प्रयोग नहीं किया जाएगा  कि उसकी मृत्यु हो जाए

(  असाधारण परिस्थितियों के सिवाय, कोई भी स्त्री सूर्यास्त के पश्चात और सूर्योदय के पहले गिरफ्तार नहीं की जाएगी और जहां ऐसी असाधारण परिस्थितियों विद्यमान है  वहां स्त्री पुलिस अधिकारी, लिखित में रिपोर्ट करके, ऐसे प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व  अनुज्ञा अभिप्राप्त करेगी, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर अपराध किया गया है या गिरफ्तारी की जानी है)


अगर गिरफ्तार किया जाने वाला व्यक्ति यदि गिरफ्तारी से बचने के लिए भागता है या बलपूर्वक प्रतिरोध करता है  तब पुलिस अधिकारी हर आवश्यक साधन जैसे लाठी, डंडा या उसे मारपीट कर या  उसे डरा धमका कर उसकी गिरफ्तारी की जा सकती है  लेकिन बल का प्रयोग उतना ही किया जाएगा कि उस मारपीट या बल से  से गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति की मृत्यु ना हो  लेकिन हां ऐसा उस स्थिति में किया जा सकता है जब गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति पर उस अपराध को करने का आरोप है जिसके लिए उसे मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडित किया जा सकता है   लेकिन अगर कोई पुलिस अधिकारी आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग करता है तो उसके विरुद्ध पुलिस अधिनियम 1861 धारा 5 के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है


दिलीप के० बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी और  निरोध में रखे गए व्यक्ति के संबंध में संरक्षात्मक निर्देश


1. जो पुलिसकर्मी गिरफ्तार कर रहे हैं या गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ कर रहे हैं वह अपने पदनाम के साथ-साथ अपने नाम का टैग और दृष्टिगोचर और स्पष्ट पहचान धारण करना होगा ऐसे समस्त पुलिसकर्मियों की जो गिरफ्तारी किए गए व्यक्ति से पूछताछ कर रहे हो, विवरणियों को एक रजिस्टर में अब लिखित करना होगा


2. ऐसे पुलिस अधिकारी जो गिरफ़्तारी का कार्य कर रहे हो, गिरफ्तारी के समय एक ज्ञापन तैयार करना होगा और ऐसे ज्ञापन को कम से कम एक ऐसे साक्षी द्वारा साक्षांकित करना होगा जो किया तो गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के परिवार का सदस्य होगा या उस स्थान के एक प्रतिष्ठित  व्यक्ति होगा जहां गिरफ्तारी की गई है वहां ज्ञापन गिरफ्तारी व्यक्ति द्वारा भी   प्रतिहस्ताक्षरित होगा और उसमें गिरफ्तारी का समय और उसकी तारीख भी  होगी

3. वह व्यक्ति जिसे गिरफ्तार किया गया है  अथवा जिसे निरोध में रखा गया है और जिसे पुलिस स्टेशन अथवा पूछताछ केंद्र अथवा हवालात में ले गई है  इस बात का हकदार होगा कि व्यवहार्य: यथाशीघ्र उसके किसी मित्र अथवा नातेदार को यह सूचित कर दिया जाए कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और विशेष स्थान पर निरुद्ध कर रखा गया है जब तक की गिरफ्तारी के ज्ञापन का  साक्ष्कयांकन  साक्षी स्वयं उस गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का  मित्र अथवा नातेदार ना हो

4. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का गिरफ्तारी का समय और स्थान और उसकी  अभिरक्षा का स्थान भी पुलिस द्वारा अवश्य अधिसूचित किया जाना चाहिए , जहां उस गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का निकटतम मित्र अथवा नातेदार उस जिले अथवा नगर के बाहर रहते हो| अधिसूचना का यह कार्य उस जिले के और संबंधित क्षेत्र के पुलिस स्टेशन के विधिक सहायता संघटन के माध्यम से तार द्वारा गिरफ्तारी के बाद 8 से 12 घंटे की अवधि के भीतर किया जाना चाहिए

5. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी अथवा निरोध के बाद यथाशीघ्र उसके अधिकार से अवश्य अवगत करा देना चाहिए कि वह अपनी गिरफ्तारी अथवा   निरोध की सूचना किसी को दे सकता है

6. निरोध के स्थान पर एक डायरी में गिरफ्तार व्यक्ति के संबंध में आवश्य ही  प्रविष्टि की जाएगी जिस में गिरफ्तार व्यक्ति के उस निकटतम मित्र का नाम उल्लिखित होगा जिसे गिरफ्तारी की सूचना दी गई थी

7. गिरफ्तार व्यक्ति यदि निवेदन करता है तो गिरफ्तारी के समय उसकी बड़ी और छोटी  क्षतियो की परीक्षा कराई जाएगी जो कि यदि कोई हो , उसके शरीर पर पाई जाए और उसे उस समय अभिलिखित भी किया जायेगा| उस निरीक्षण ज्ञापन पर गिरफ्तार व्यक्ति और गिरफ्तारी करने वाले पुलिस  अधिकारी दोनों का आवश्यक हस्ताक्षर होगा और उसको एक प्रति गिरफ्तार व्यक्ति को दी जाएगी

8. गिरफ्तार व्यक्ति की प्रति 48 घंटे पर   अभिरक्षा में उसकी निरोध के दौरान एक प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा चिकित्सा परीक्षा कराई जाएगी जो कि राज्य अथवा संघ राज्य क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा नियुक्त अनुमोदित   किया हुआ चिकित्सक होगा

9. समस्त दस्तावेजों की प्रतियां जिसमें ऊपर उल्लिखित गिरफ्तारी का ज्ञापन भी सम्मिलित है इलाका मजिस्ट्रेट को भी उसके अभिलेख के लिए भेजी जाएंगी


10. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को पूछताछ के दौरान न कि उस संपूर्ण अवध में अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जा सकती है 


11. एक पुलिस नियंत्रण कक्ष प्रत्येक जिले और राज्य मुख्यालय पर स्थापित करना होगा और वहां पर गिरफ्तारी और गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की  अभिरक्षा के स्थान से उस अधिकारी द्वारा जिसने गिरफ्तारी का कार्य किया है, सूचना भेजनी होगी यह गिरफ्तारी के 12 घंटे के भीतर किया जाएगा और पुलिस नियंत्रण कक्ष पर उसे किसी सहज दृश्य सूचना पटल पर चिपकाया जाएगा

नोट- उच्चतम न्यायालय के उपयुक्त आदेश का यदि अनुपालन नहीं किया जाता है तो संबंधित अधिकारी न केवल विभागीय कार्रवाई के लिए उत्तरदाई होंगे बल्कि  वे न्यायालय की अवमानना के लिए दंडित भी किए जा सकते हैं





गुरुवार, 25 मार्च 2021

कमिश्नरिया क्या होती है कमिश्नर (मंडलायुक्त) क्या होते हैं?

इस लेख में आप शार्ट में जानेंगे कमिश्नरिया क्या होती है और कमिश्नर जिसे हम मंडलायुक्त भी कहते हैं क्या होते हैं और उनके कार्य क्या होते हैं?


  कमिश्नरिया  उत्तर प्रदेश 18 कमिश्नर यो में विभाजित है सरल भाषा में जिस प्रकार परगनाओं से मिलकर तहसील बनती है तथा तहसील से मिलकर जिला बनता है उसी प्रकार जिलों से मिलकर कमिश्नरी बनती है
इस प्रकार 1 कमिश्नरी में दो या दो से अधिक जिले हो सकते हैं 

 कमिश्नरी के कार्य जब कोई आपका कृषि की जमीन से संबंधित कोई मामला होता है राजस्व से जुड़ा मामला है तो सबसे पहले आप तहसीलदार  न्यायालय के यहां जाते हैं उसके बाद आप अपील के लिए सहायक कलेक्टर के पास जाते हैं और उसके बाद वह मामले की अपील आप कमिश्नरी में कर सकते हैं 

* कमिश्नरी एक राजस्व न्यायालय हैं जो राजस्व मामलों को देखता है

* कमिश्नरी मे केवल अपीलीय मामले जाते हैं

 कमिश्नर क्या होते हैं कमिश्नर यहां पर पुलिस कमिश्नर की बात नहीं की गई है यहां पर बात की गई है कमिश्नर जिन्हें हम  मंडलायुक्त की भी कहते हैं 

* इनकी नियुक्ति राज्य सरकार करती है 

*यह कमिश्नरयो में होते हैं और यह राजस्व मामले देखते हैं

* यह राजस्व न्यायालय और राजस्व अधिकारी होते हैं

* तथा कमिश्नर जिसे मंडलायुक्त बोलते हैं यह कलेक्टर से बड़ा पद है



मंगलवार, 23 मार्च 2021

IPC 499 ,500 मानहानि कब होती है लांछन लगाना

 इस लेख में शॉर्ट में और सरल भाषा में आप जानेंगे कि मानहानि कब होती है और और कब नहीं होती है मानहानि के लिए कितने वर्ष का कारावास है 



व्यक्तियों की प्रतिष्ठा(इज्जत या सम्मान )को बनाए रखने के लिए IPC की धारा 499 से 502 तक में मानहानि के बारे में प्रावधान किया है लेकिन आज हम आपको आईपीसी की धारा 499 मानहानि और आईपीसी की धारा 500 मानहानि के लिए दंड के बारे में बताएंगे


IPC 499  मानहानि   किसी व्यक्ति के बारे में कोई लांछन इस आशय से लगाया या प्रकाशित किया जाता है कि ऐसे लांछन से ऐसी व्यक्ति की  ख्याति (सम्मान) प्रतिष्ठा की  अपहानी  होती है या कोई व्यक्ति जानबूझकर यह विश्वास करने का कारण देखते हुए उसके बारे में कोई गलत लांछन लगाता है या  प्रकाशित करता है   जिससे किसी व्यक्ति  के सम्मान की  अपहानी  होगी तो लांछन लगाने या प्रकाशित करने वाले व्यक्ति को सिर्फ अपवादित दशाओं को छोड़कर
ऐसा माना जाएगा कि जिसने लांछन लगाया है वह व्यक्ति उस व्यक्ति की  मानहानि करता है

1. उदाहरण - अगर कोई व्यक्ति किसी मरे हुए व्यक्ति को भी कोई लांछन लगाता है तो वह भी मानहानि की श्रेणी में आएगा   क्योंकि मरे हुए व्यक्ति पर लांछन लगाने से उस मरे हुए व्यक्ति के पुत्र पुत्री या रिश्तेदार या जो भी संबंधी है उनको पीड़ा होगी उनको परेशानी होगी  उनके सम्मान की अपहानि होगी इसलिए  यह मानहानि की कोटि में आता है


नोट-  किसी व्यक्ति पर लांछन बोले गए शब्दों द्वारा, या किसी अखबार या लिखे गए शब्दों द्वारा   या संकेतों द्वारा  लगाया जा सकता है  ,और लांछन द्वारा दूसरे व्यक्ति  की प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाने का आशय मानहानि का महत्वपूर्ण आवश्यक तत्व है 


2. उदाहरण- अगर कोई व्यक्ति किसी कंपनी या व्यक्तियों के समूह पर इस आशय से लांछन लगाता है कि उस कंपनी की बदनामी हो जो भी व्यक्तियों का समूह है उनकी बदनामी हो  उनका नुकसान हो तो यह स्थिति भी मानहानि की श्रेणी में आती है


मानहानि के कुछ अपवाद जब कुछ लांछन को मानहानि की श्रेणी में नहीं रखा जाता है


1. अपवाद- सत्य बात का लांछन जिसका लगाया जाना है या  प्रकाशित किया जाना लोक कल्याण के लिए अपेक्षित है किसी ऐसी बात का लांछन लगाना जो किसी व्यक्ति के संबंध में सत्य हो वास्तव में सत्य है तो वह मानहानि नहीं है        उदाहरण- अगर कोई दुकानदार खाने का तेल में वास्तव में मिलावट करता है और उसका खाने का तेल वास्तव में खराब है  तो आप लोगों को बता सकते हैं कि वह दुकानदार बेकार मिलावटी खाने का तेल बेचता है लोगों को आप सचेत कर सकते हैं जो कि मानहानि की श्रेणी में नहीं आता है 


2. अपवाद न्यायालयों की कार्रवाई की  रिपोर्टो का प्रकाशन करना -किसी न्यायालय को कार्रवाई की या किन्ही ऐसी कार्रवाइयों के परिणामम की सारतः सही रिपोर्ट को प्रकाशित करना मानहानि नहीं है


3. प्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष सदभावना पूर्वक अभियोग लगाना मानहानि नहीं है


4. अधिवक्ता द्वारा नोटिस का जवाब भी मानहानि नहीं है यदि कोई अधिवक्ता किसी व्यक्ति के नोटिस का जवाब अपने लिपिक से लिखवाता  है तथा ऐसे जवाब में लांछन होते हैं , तब भी इसे धारा 499 एवं 500 के प्रयोजनार्थ  प्रकाशन नहीं माना जा सक्ता क्योंकि अधिवक्ता का यह कार्य उसके वृत्तिक संसूचना के अधिकार के अंतर्गत संरक्षित है


IPC धारा 500 मानहानि के लिए दंड-  जो कोई किसी अन्य व्यक्ति की मानहानि करेगा वह सादा कारावास से जिसकी अवधि 2 वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा

शनिवार, 20 मार्च 2021

sc.st अनुसूचित जाति की भूमि कैसे खरीदी जा सकती है UPRC धारा 98,99

 इस लेख में बात करेंगे कि उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों को जमीन बेचने पर क्या अधिकार क्या कानूनी प्रावधान है कब जमीन बेच सकते हैं और कब नहीं बेंच सकते हैं


 
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 (UPRC 2006)
 की धारा 98 और 99 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भूमिधरो द्वारा अंतरण पर प्रतिबंध लगाया गया है


UPRC धारा 98 के अनुसार अनुसूचित जाति के भूमिधरो द्वारा अंतरण पर प्रतिबंध- (1) इस अध्याय के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना , अनुसूचित जाति के किसी भी भूमिधर को कलेक्टर की लिखित पूर्व अनुज्ञा ( परमिशन) के बिना, कोई भूमि किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति से अन्य किसी व्यक्ति को विक्रय( बेचना), बंधक या पट्टा द्वारा अंतरित( बैनामा कराना )करने का अधिकार नहीं होगा:


लेकिन कलेक्टर द्वारा ऐसी  अनुज्ञा या ऐसी परमिशन तभी दी जा सकती है जब- यह कारण हो



(क). अनुसूचित जाति के भूमिधर के पास धारा 108 की उप धारा(2) के खंड  क, अथवा धारा 110 के खंड क, जैसी भी स्थिति हो, मे विनिर्दिष्ट कोई जीवित उत्तराधिकारी ना हो  तो ऐसी कंडीशन में कलेक्टर भूमि बेचने के लिए परमिशन दे सकता है  या फिर

(ख) अनुसूचित जाति का भूमिधर जिस जिले में अंतरण के लिए प्रस्तावित भूमि स्थित है , और वह उस जिले से किसी दूसरे जिले में अथवा किसी दूसरे राज्य में नौकरी अथवा किसी व्यापार या नियमित रूप से या सामान्य रूप से वही रह रहा है  तो ऐसी कंडीशन में भी उसे जमीन बेचने के लिए कलेक्टर परमिशन दे सकता है या देने का अधिकार रखता है 

(ग) कलेक्टर का समाधान हो गया है कि विहित कारणों से भूमि के अंतरण की अनुज्ञा देना आवश्यक है तो कलेक्टर भूमी बेचने के लिए लिखित रूप से परमिशन दे सकता है

UPRC धारा 99. अनुसूचित जनजाति के भूमिधर द्वारा अंतरण पर प्रतिबंध- इस अध्याय के उपबंधो पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना  अनुसूचित जनजाति के किसी भूमिधर को भूमि विक्रय दान बंधक या पट्टा के द्वारा किसी भूमि को अनुसूचित जनजाति से अलग किसी व्यक्ति को अंतरण करने का अधिकार नहीं होगा

दोस्तों जैसा कि UPRC 98 में अनुसूचित जाति के व्यक्ति को अनुसूचित जाति के सिवा किसी अन्य व्यक्तियों को जमीन बेचने का अधिकार नहीं है
 उसी तरह UPRC 99 में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति के सिवा किसी को अपनी भूमि बेचने का अधिकार नहीं है

विकास प्राधिकरण अप्रूव्ड कॉलोनी प्लाटिंग कौन सी होती है और फ्री होल्ड कॉलोनी जमीन कौन सी होती है

1 - D A  एप्रूव्ड ( डी ए से स्वीकृत)  वह जमीन जो विकाश प्राधिकरण किसानों से खरीद कर स्वयं या किसी बड़े बिल्डर से शहरी आवासीय योजना के मानको क...