शनिवार, 26 जून 2021

police batch

Non gazetted officer

1.police constable
2.Senior Police Constable
3.head constable!
4.ASI Assistant Sub Inspector
5.SI Sub Inspector
6.PI police inspector


State Police Gazetteed officer

7.DSP Deputy Superintendent of police
8.Add.SP Additional superintendent of police
9.SP superintendent of police
10.SSP Senior Superintendent of Police


IPS OFFICER 

1.ASS.SP assistant superintendent of police
2.Ass.SP  assistant superintendent of police
3.DSP Deputy Superintendent of Police
4.Add.SP Additional superintendent of police
5.SP superintendent of police
6.Senior Superintendent of Police
7.DIG Deputy Inspector General
8.IGP Inspector General of Police
9.ADGP Additional Director General of Police
10.DGP Director General of Police
11.DIB Director intelligence bureau

शुक्रवार, 25 जून 2021

DSP. CO KE UNDER ME KYA ATA HAI

आज के लेख में जाने की DSP डीएसपी के बारे में सामान्य जानकारी डीएसपी के अधीन क्या क्या आता है दोस्तों अपन डीएसपी के बारे में कुछ सुना होगा डीएसपी एक पुलिस प्रशासन में बहुत ही सम्मानजनक और जिम्मेदारियों से भरा बड़ा पद है

DSP .Deputy Superintendent of Police पुलिस उपाधीक्षक या CO circle officer अनुमंडल पदाधिकारी या क्षेत्राधिकारी भी कहते है

आज इस लेख में बात करेंगे तो DSP के अंडर में क्या क्या आता है इसके कार्य और उसके कार्य क्षेत्र के बारे है 

ड्रेस और बैच  

DSP वर्दी पर जो बैग लगा होता है उस पर 3 स्टार होते हैं और किसी भी तरह की पट्टी नहीं होती है जानकारी के लिए आपको बता दूं कि SHO ,SO के भी 3 स्टार होते हैं लेकिन उसके बेच पर नीली या लाल पट्टी होती है लेकिन DSP के कंधे पर केवल 3 स्टार होते हैं और जिस प्रदेश से होते हैं उस प्रदेश का उस बैच के नीचे शार्ट नाम लिखा होता है जैसे - शार्ट में उत्तर प्रदेश पुलिस लिखा होता है या मध्य प्रदेश पुलिस या बिहार से तो बिहार पुलिस और किसी भी तरह की रंग की पट्टी नहीं होती है 

DSP बनते कैसे हैं सामान्य जानकारी 

DSP बनने के लिए दो रास्ते हैं या तो इंस्पेक्टर से प्रमोशन द्वाराDSP बना जा सकता है या स्टेट पीएससी क्वालीफाई कर के डायरेक्ट DSP बना जा सकता है 

DSP के कार्य किसके अंडर में में क्या-क्या है

DSP क्षेत्राधिकारी होता है इसके अधीन उस क्षेत्र में आने वाले प्रत्येक थाने, चौकी उसके अंडर में आते हैं और वह समय-समय पर ऐसे थाना चौकी का निरीक्षण कर सकता है तथा जो भी उस क्षेत्र के थानों चौकियों में पुलिस के अधिकारी हैं वहां के उनके साथ मीटिंग कर सकता है और लॉ एंड ऑर्डर उस क्षेत्र में सही तरीके से चल रहा है या नहीं चल रहा है का निरीक्षण और कानून व्यवस्था अच्छी सी बनी रहे उसकी जिम्मेदारी होती है

और भी सरल भाषा में बात करे तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई अधिकारियों को मिलकर काम पढ़ना पड़ता है और एक दूसरे के अधीन कार्य करते हैं जैसे 1 जिले में पुलिस प्रशासन का सबसे बड़ा अधिकारी SP होता है उसी तरह जिला कई तहसील क्षेत्रों में विभाजित होता है और क्षेत्र का सबसे बड़ा पुलिस अधिकारी CO अथवा DSP होता है और क्षेत्र कई थाने पड़ते हैं जिसमें थानों का सबसे बड़ा अधिकारी SHO या  SO होते हैं

आशा करता हूं कि आप इस लेख में अच्छी तरीके से समझ गए होंगे DSP जैसी कई जगहों पर CO कहते हैं
उसके कार्य क्या होते हैं और कैसे बनते हैं और इसके अधीन में कौन-कौन आता है





गुरुवार, 17 जून 2021

UPSC 24 POSTS

दोस्तों आज की लेख में बात करेंगे UPSC Union Public Service Commission हिन्दी मे संघ लोक सेवा आयोग है वैसे अपने सामान्तय सुना होगा UPSC क्वालीफाई करके IAS ,IFS ,IPS बनते हैं लेकिन आज इस लेख में जानेंगे कि   UPSC कुल कितने सर्विस  का एग्जाम करवाती है UPSC 24 तरह की सर्विस  एग्जाम UPSC करवाती है चलिए जान लेते हैं वह 24 सर्विस कौन-कौन सी हैं और इन सभी सर्विस को तीन कैटेगरी में बांटा गया है

UPSC Posts – 3 Types of Civil Services
    

 All India Civil Services-
अखिल भारतीय सिविल सेवा

 Indian Administrative Service (IAS)
भारतीय प्रशासनिक सेवा

 Indian Police Service (IPS)
भारतीय पुलिस सेवा

 Indian Forest Service (IFoS)
भारतीय वन सेवा

 Group 'A' Civil Services

 Indian Foreign Service (IFS)
भारतीय विदेश सेवा

 Indian Audit and Accounts Service (IAAS
भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा

 Indian Civil Accounts Service (ICAS)
भारतीय सिविल लेखा सेवा

 Indian Corporate Law Service (ICLS)
भारतीय कॉर्पोरेट कानून सेवा

 Indian Defense Accounts Service (IDAS)
भारतीय रक्षा लेखा सेवा

 Indian Defense Estates Service (IDES)
भारतीय रक्षा संपदा सेवा

 Indian Information Service (IIS)
भारतीय सूचना सेवा (

 Indian Ordnance Factories Service (IOFS)
भारतीय आयुध निर्माणी सेवा

 Indian Communication Finance Services (ICFS)
भारतीय संचार वित्त सेवाएं

 Indian Postal Service (IPoS)
 भारतीय डाक सेवा

 Indian Railway Accounts Service (IRAS)
भारतीय रेलवे लेखा सेवा

 Indian Railway Personnel Service (IRPS)
भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा

 Indian Railway Traffic Service (IRTS)
भारतीय रेल यातायात सेवा 

 Indian Revenue Service (IRS)
भारतीय राजस्व सेवा

 Indian Trade Service (ITS)
भारतीय व्यापार सेवा

 Railway Protection Force (RPF)
 रेलवे सुरक्षा बल

 3. Group 'B' Civil Services

 Armed Forces Headquarters Civil Service 
सशस्त्र सेना मुख्यालय सिविल सेवा

 DANICS दानिक्स

 DANIPS दानिप्स

 Pondicherry Civil Service
 पांडिचेरी सिविल सेवा

 Pondicherry Police Service
पांडिचेरी पुलिस सेवा


मंगलवार, 15 जून 2021

BDO Block Development Officeऔर VDO Village Development Officer मैं अंतर

इस लेख में आप जानेंगे BDO और VDO मैं अंतर इनकी कार्य में अंतर और यह कैसे बनते हैं और उन में कौन अधिक पावरफुल होता है

सबसे पहले इन की फुल फॉर्म इन के नामों के बारे में जान लेते हैं उसके बाद चर्चा करेंगे इनके कार्यों के बारे में
BDO Block Development Office खंड विकास अधिकारी VDO Village Development Officer  
ग्राम विकास अधिकारी दोस्तों अब आपको इनके नाम के बारे में पता चल गया होगा


BDO  और VDO के कार्य में अंतर ?


BDO के कार्य 

BDO Officer योजनाओं और Blocks के विकास से संबंधित सभी कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की जाँच करते है।

सरकार की तरफ से जारी किए जाने वाली योजनाएं नीतियां जमीनी स्तर पर दिए जाने वाले सभी योजनाएं प्रखंड में ही भेजे जाते हैं और फिर उसे प्रखंड पदाधिकारी अपने ब्लाक के अंतर्गत जितने भी क्षेत्र होते हैं 

दोस्तों जैसा कि एक जिला स्तर का सबसे बड़ा विकास अधिकारी CDO chief development officer होता है वह होता है CDO उसके बाद जो ब्लॉक स्तर का विकास अधिकारी होता है वह होता है BDO Block development officer  जो ब्लॉक स्तर के विकास पर ध्यान देता है जैसे किसी प्रोजेक्ट की शुरुआत है या जो भी सरकार द्वारा नीतियां है जो भी सरकार द्वारा नए-नए विकास किए जा रहे हैं सुविधाएं दी जाती है वह ब्लॉक स्तर पर सभी को मुहैया उनकी जांच उनकी देखरेख कराने का काम वीडियो करते हैं

* यह राजपत्रित अधिकारी होता है

VDO Village Development Officer  ग्राम विकास अधिकारी  के कार्य ( प्रधान सचिव)

* यह राजपत्रित अधिकारी नहीं होता है
* यह ग्राम विकास के लिए कार्य करते हैं ग्राम विकास कार्यों की जिम्मेदारी  इनके ऊपर होती है
* जो भी सरकार द्वारा राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा चलाई गई परियोजनाओं को  गांव में सुचारू रूप से संचालित करवाना  आदि  काम होते हैं वह VDO के होते हैं

दोस्तों के आप को सबसे महत्वपूर्ण बात यहां पर जानने को मिली होगी कि जो भी सरकार की नीतियां है जो भी सरकार की योजना है उनको लोगों तक पहुंचाने में कई अधिकारियों को कार्य करना पड़ता है उसी तरह 1 जिले का विकास अधिकारी CDO होता है  ब्लॉक स्तर का व BDO होता है  उसी तरह ग्रामीण स्तर का VDO होता है अब आप BDO और VDO में अंतर जान चुके होंगे

BDO Block Development Office कैसे बनते हैं ? 

* BDO बनने के लिए एक 21 से 40 वर्ष होती है
* BDO करने के लिए ग्रेजुएशन  कंप्लीट जरूरी है
* वीडियो बनने के लिए UPPSC या जो राज्य संघ लोक सेवा आयोग द्वारा करवाई जाती है परीक्षा होने पास करके BDO  बना जा सकता है

VDO  Village Development Officer  कैसे बनते हैं?

 *VDO बनने के लिए उम्र सीमा 18 से 40
* वीडियो बनने के लिए 12th CCC  होना चाहिए
* वीडियो बनने के लिए UPSSSC क्वालीफाई करना पड़ता है परीक्षा क्वालीफाई करने के बाद आप वीडियो बन सकते हैं परीक्षा क्वालीफाई करने के बाद VDO बन सकते हैं


UP मे संपत्ति,जमीन,घर, खरीदने पर लगने वाला स्टांप शुल्क अब डीएम तय करेंगे( संपत्ति मूल्यांकन नियमावली 1997 में संशोधन)

योगी कैबिनेट ने सोमवार को स्टांप एवं रजिस्ट्री विभाग द्वारा रखे गए संपत्ति मूल्यांकन नियमावली 1997 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है   

आइए जानते हैं यह संशोधन क्या है और डीएम को कब आवेदन करना पड़ेगा

पहले कई स्टांप शुल्क चोरी के मामले सामने आते थे जिसके कई मामले न्यायालय में चल रहे थे उन मामलों को खत्म करने के लिए और स्टांप शुल्क चोरी से बचने के लिए और रजिस्ट्री के समय लगने वाले स्टांप शुल्क तय करने में विवाद न हो इसलिए अब उत्तर प्रदेश में फ्लैट जमीन मकान दुकान आदि भूमि संपत्तियां खरीदने पर लगने वाले स्टांप शुल्क का निर्धारण जिला अधिकारी के स्तर से किया जाएगा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी कैबिनेट ने सोमवार को स्टांप एवं रजिस्ट्री विभाग द्वारा रखे गए संपत्ति मूल्यांकन नियमावली 1997 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है

इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद अब भूमी संपत्तियों की कीमत तय करने और रजिस्ट्री के समय लगने वाले स्टांप शुल्क तय करने में विवाद नहीं होगा इससे मुकदमों की संख्या घटेगी अब कोई भी व्यक्ति  उत्तर प्रदेश में कहीं भी कोई भी जमीन, मकान, फ्लैट ,दुकान  खरीदना चाहेगा तो सबसे पहले उसे संबंधित जिले के डीएम को एक प्रार्थना पत्र देना होगा और साथ ही ट्रेजरी चालान के माध्यम से कोषागार में ₹100 का शुल्क जमा करना होगा उसके बाद डीएम लेखपाल से उस भूमि संपत्ति का डीएम सर्किल रेट के हिसाब से मूल्यांकन करवाएंगे इसके बाद उक्त संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला स्टांप शुल्क भी लिखित रूप से निर्धारित किया जाएगा


 क्यों पड़ी इस संशोधन की जरूरत ?

प्रॉपर्टी खरीदने में अक्सर स्टांप चोरी की शिकायतें आती रहती हैं और कई बार खरीददार वास्तव में प्रॉपर्टी की सही मालीयत नहीं देता है और विक्रेता या प्रॉपर्टी डीलर के बताए दाम पर खरीद लेता है  और सही स्टांप शुल्क निर्धारित नहीं हो पाती है या जानबूझकर स्टांप शुल्क चोरी की जाती है इससे कई बार इस कारण से जो भी प्रॉपर्टी खरीदी जाती है वह फस जाती है यह बड़े पैमाने पर लंबित मुकदमों को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है नई व्यवस्था से स्टांप एवं रजिस्ट्री विभाग में ऐसे मुकदमों की संख्या पर कमी लाई जाएगी


सोमवार, 14 जून 2021

IPC SECTION- 309 आत्महत्या करने का प्रयत्न

इस लेख में आप जानेंगे IPC की धारा 309 के प्रावधान और इस धारा के अंतर्गत कितने वर्षों की सजा और जुर्माना है और कई प्रकार के उदाहरण भी जानेंगे

जैसा कि पिछले लेख में हम ने आईपीसी की धारा 305 शिशु व उन्मुक्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण और 306 आत्महत्या का दुष्प्रेरण के बारे में बताया था लेकिन इस लेख में आईपीसी की धारा 309 जो इनय धाराओं से बिल्कुल अलग है  इस लेख में जान लेते हैं आईपीसी की धारा 309 के बारे में


IPC 309-  आत्महत्या का प्रयत्न- जो कोई व्यक्ति आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा और उस आत्महत्या जैसे अपराध के करने के लिए कोई कार्य करेगा वह सादा कारावास जिसकी अवधि 1 वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा

 संपूर्ण विधी में एक ऐसा अपराध है जो पूरा हो जाने पर दंडनीय नहीं होता क्योंकि जो व्यक्ति आत्महत्या कर लेगा उसकी तो मृत्यु हो जाएगी फिर उसे तो दंडित किया नहीं जा सकता इसलिए आत्महत्या की कोशिश करने वाले व्यक्ति को दंडित किया जा सकता है

 1.उदाहरण- एक स्त्री कुएं में कूदकर आत्महत्या करने के आशय से   कुआं की ओर दौड़ती है लेकिन कुएं में कूदने से पूर्व ही उसे एक व्यक्ति द्वारा पकड़ लिया जाता है न्यायालय निर्धारण किया कि वह आत्महत्या के प्रयास की दोषी नहीं थी क्योंकि कुएं में कूदने से पूर्व वह अपने आशय को बदल सकती थी यह मात्र एक तैयारी थी


2. उदाहरण -एक स्त्री कुएं में कूदकर  आत्महत्या के आशय से और वह कुएं में कूद जाती है गांव वाले लोगों द्वारा उसे कुएं से बाहर मरने से पहले ही निकाला जाता है और भाई स्त्री बस जाती है ऐसे में वह स्थिति आईपीसी की धारा 309 के अंतर्गत दोषी होगी क्योंकि उसने आत्महत्या करने की कोशिश की


3. उदाहरण- एक स्त्री का पति उसके साथ मारपीट करता है और एक बार उस स्त्री से कोई घर में काम बिगड़ जाता है वह स्त्री पिटने के डर के कारण कुएं में आत्महत्या के आशय से कुएं में कूद जाती है वह IPC की धारा 309 के अंतर्गत दोषी नहीं होगी क्यों कि उसका आशय आत्महत्या का नहीं था बल्कि अपने पति के डर के कारण उसे मजबूरन यह करना पड़ा

शुक्रवार, 11 जून 2021

भारतीय दंड संहिता IPC 305 ,306 आत्महत्या का दुष्प्रेरण

इस लेख में आप सरल और उदाहरण सहित जानेंगे कि भारतीय दंड संहिता 305 306 में क्या प्रावधान है कितनी सजा का प्रावधान है

 धारा 305- शिशु या उन्मुक्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण- यदि कोई 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति को या किसी बच्चे या नासमझ बालक को या किसी पागल मूर्ख व्यक्ति को कोई व्यक्ति आत्महत्या के लिए बोलता है या आत्महत्या करने के लिए उकसाता है
तो वह मृत्यु या आजीवन कारावास या दोनों में से किसी बात के कारावास जिसकी अवधि 10 वर्ष से अधिक की ना हो सकेगी और जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा 

 उदाहरण: क एक स्वस्थ दिमाग का व्यक्ति है अगर वह किसी बच्चे को या किसी पागल व्यक्ति को बोलता है कि वह आत्महत्या कर ली उसका इस धरती पर बोझ है उसे आत्महत्या कर लेनी चाहिए और वह आत्महत्या भी कर लेता है  तो का व्यक्ति IPC की धारा 305 के अंतर्गत दोषी होगा

IPC 306-  आत्महत्या का दुष्प्रेरण: यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करें तो उस व्यक्ति को जिसने भी आत्महत्या का दुष्प्रेरण किया होगा जिस व्यक्ति ने उस व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाया होगा आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया होगा वह व्यक्ति ऐसे किसी भी कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा

 उदाहरण : यदि कोई नवविवाहित महिला का पति उस महिला को दहेज की मांग करता है दहेज के लिए प्रताड़ित करता है नवविवाहित महिला का पति के साथ-साथ उस पति के माता-पिता भी उस नवविवाहित को प्रताड़ित करते हैं और ऐसे में यदि वह नवविवाहित महिला आत्महत्या कर लेती है तो यह मामला आईपीसी की धारा 306 का होगा और उसका पति और उस पति के माता-पिता दोनों ही आईपीसी की धारा 306 के अपराधी होंगे

 उदाहरण नंबर 2: किसी हिंदू विधवा को  सती होने में उसकी वास्तविक रुप से सहायता करने वाले जो भी व्यक्ति होंगे उन्हें आत्महत्या के दुष्प्रेरण के लिए दोषी माना जाएगा

 note: आत्महत्या के दुष्प्रेरण के अपराध में विश्वसनीय साक्ष्य होना बहुत ही जरूरी है

गुरुवार, 27 मई 2021

ESMA ACT 1968 एस्मा क्या है ?

 ESMA- (ESSENTIAL SERVICES MAINTENANCE ACT 1968) आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम

जब कभी भी कर्मचारी हड़ताल पर बैठते हैं तो एस्मां भी चर्चा में आ जाता है या आपने एस्मा कई बार सुना होगा चलिए जानते हैं एस्मा क्या है? 

 कर्मचारियों की हड़ताल को प्रतिबंध रोकने हेतु लगाया जाता है ESMA  में लागू करने से पहले इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को किसी समाचार पत्र रेडियो  टीवी या अन्य किसी स्रोतों के द्वारा सूचित किया जाता है
  इस एक्ट की धारा 2 में सेवा भी उल्लेखित की गई है जैसे पर परिवाहन ,स्वास्थ्य , सफाई सेवा आदि को यथा पूर्वक बनाए रखने के तथा कर्मचारियों की हड़ताल रोकने  जिससे व्यवस्थाएं सेवाएं बिना किसी रूकावट के चलती रहे इसीलिए यह कानून बनाया गया है  

अभी हाल ही में 2021 कोविड के चलते में  उत्तर प्रदेश  मे  ESMA  लागू हुआ है

ESMA Act  से कर्मचारियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?


1. इस एक्ट के लागू होने के बाद अगर कोई कर्मचारी हड़ताल करता है तो वह एक दंडनीय अपराध होगा 


2. अवैध हड़ताल  हेतु जुर्माना- यदि इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाला कोई व्यक्ति इस एक्ट के लागू होने के बाद हड़ताल करता है या उस में भाग लेता है तो वह 6 माह के कारावास और लगभग ₹200 के जुर्माने से दंडित होगा 

3. हड़ताल को उकसाने के लिए दंड-  कोई भी व्यक्ति जो अन्य व्यक्तियों को हड़ताल के लिए उकसा ता है तो वह 1 साल के कारावास या  लगभग हजार रुपए से जुर्माने से दंडित किया जाएगा

4. बिना वारंट के गिरफ्तारी की शक्ति- इस अधिनियम के लागू होने के बाद अगर  कर्मचारी हड़ताल करते हैं तो पुलिस उन्हें बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है

        सरकारे कब और क्यों एस्मा लगाती है ?

1 सरकार ESMA इसलिए लगाती हैं  जब कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से लोगों के लिए आवश्यक सेवाओं पर बुरा असर पड़ने की आशंका होती है, यह कानून जो अनिवार्य सेवाओं को बनाए रखने के लिए लागू किया जाता है

2. इसके तहत जिस सेवा पर ESMA एस्मा लगाया जाता है उससे संबंधित कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते अन्यथा को छह माह तक की कैद हो सकती है

3. ESMA  के रूप में सरकार के पास एक ऐसा हथियार है जिससे वह जब चाहे कर्मचारियों के आंदोलन को कुचल सकती है हड़ताल पर प्रतिबंध लगा सकती है जिससे सार्वजनिक सेवाओं या कर्मचारियों द्वारा जो सेवाएं दी जा रही है उनमें हड़ताल की वजह से रुकावट ना आए

यह एक केंद्रीय कानून है जिसे 1968 में लागू किया गया था लेकिन राज्य सरकार इस कानून को लागू करने के लिए स्वतंत्र हैं
http://akshay-lawadvicer.blogspot.com/2021/05/esma-act-1968.html







बुधवार, 19 मई 2021

ED Enforcement Directorate प्रवर्तन निदेशालय क्या है इसके कार्य


ED क्या होती है आपने कई बार TV  चैनल पर या अखबारों में सोशल मीडिया के जरिए क्या या हाई प्रोफेशनल मामलों में घोटालों में ED का नाम सुना होगा चलिए इस लेख में जानेंगे कि ED क्या होती है ED के कार्य क्या होते हैं?

ED क्या है

ED Enforcement Directorate प्रवर्तन निदेशालय  और  Directorate General of Economic Enforcement आर्थिक प्रवर्तन महानिदेशालय होता है कहते हैं
 
ED इसका गठन 1 मई 1956 को हुआ विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 के तहत विनिमय नियंत्रण कानूनों उल्लंघन और आर्थिक मामलों के उल्लंघन से या आर्थिक अपराध से लड़ने के लिए यह जांच एजेंसी जिम्मेदार है इन सब से निपटने के लिए ही इसका गठन किया गया था।इसका हेड क्वार्टर दिल्ली में है और 

अन्य कार्यालय जोन-  मुंबई दिल्ली, चेन्नई ,कोलकाता ,चंडीगढ़, बेंगलुरु  हैदराबाद में है 

ED मे भारतीय राजस्व सेवा  FS .भारतीय पुलिस सेवा IPS और भारतीय प्रशासनिक सेवा IAS अधिकारियों  है 


ED  किसके अधीन आती है-

 ED भारत सरकार वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन आने वाली एक विशेष वित्तीय जांच एजेंसी है 
वर्तमान 2021 में मंत्रीनिर्मला सीतारमण वित्त मंत्री है


 ED Enforcement Directorate के  कार्य-  
 
1. FEMA- Foreign Exchange management Act
    FERA-Foreign Exchange Regulation Act
    PMLA-Prevention of Money Loundering Act इन सभी act के अंतर्गत भारत सरकार की सभी तरह की       वित्तीय जांच करने का अधिकार ED को है

2. आर्थिक अपराधों में काले धन से खरीदी हुई विदेश में पड़ी किसी भी संपत्ति पर कार्रवाई करके रोकथाम करने का अधिकार  ED  को है

3. यह PMLA Prevention of Money Loundering Act के अधीन अपराध के अपराधी के विरूद्ध सर्वेक्षण,  गिरफ्तारी, जांच ,जब्ती अभियोजन का कार्य करती है PMLA मनी लॉन्ड्रिंग( जो लोग अपने ब्लैक मनी को वाइट मनी में कन्वर्ट करते हैं ) उससे संबंधित है

 मनी लॉन्ड्रिंग का उदाहरण है-
INX मीडिया कंपनी से जुड़ा मामला 2018 में ईडी ने पी. चिदंबरमऔर उनकी बेटे पर भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था

4. वित्तीय रूप से देश में गैरकानूनी कामों पर और आय से अधिक संपत्ति की जांच करने का अधिकार ED को है

5. आर्थिक उथल-पुथल आर्थिक मामले की जांच करें और आर्थिक रूप से कानून लागू करने का अधिकार ED को है

6. ED विदेशों की पड़ी संपत्ति की जांच कर सकती है या किसी व्यक्ति पर आर्थिक अपराधों की कंप्लेन या सूचना के उस व्यक्ति की संपत्ति की जांच भी कर सकती है

7. यदि कोई विदेशों की भारी मात्रा में मुद्रा रखता है  मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध व्यापार या मुद्रा एकत्रित करता है या वह आर्थिक कानूनों का उल्लंघन करता है  तो वह अपराध है और ED के जांच का विषय है

8.न्यायिक निर्णय कार्यवाही के अंतर्गत दंड की वसूली  करती है

8. ऐसे कई केस है जो ईडी से संबंधित है जैसे-
INX मीडिया कंपनी से जुड़ा मामला , Yes Bank scam, 2G scame  

मंगलवार, 18 मई 2021

वास्तविक कब्जा सूचना के रूप में Actual possession as notice

सबसे पहले आपको उदाहरण द्वारा समझाऊं तो


 अ अपनी भूमि ₹5000 में बेचने के लिए, से एक संविदा करता है भूमि का कब्जा प्राप्त कर लेता है भूमि का कब्जा प्राप्त कर लेता है तत्पश्चात अ  ऐसी भूमि को ,के नाम ₹6000 में बेच देता है स,  ब, से भूमि में उसका क्या हित है के बारे में कोई भी जांच नहीं करता यहां भूमि पर, का कब्जा होना पर्याप्त आधार है यह मानने के लिए कि स, को, के हित की सूचना है और ब,  स के विरुद्ध संविदा के विनिर्दिष्ट पालन को परिवर्तित करा सकता है (लागू करवा सकता है)

 वास्तविक कब्जा सूचना के रूप में( actual possession as notice) 
 स्पष्टीकरण 2 संपत्ति अंतरण संशोधन अधिनियम 1929 के माध्यम से धारा 3 में जोड़ा गया यह स्पष्टीकरण कहता है कि किसी अचल संपत्ति का कब्जा उस संपत्ति के उस व्यक्ति के हक की सूचना है जिसका तत्समय (वर्तमान समय में उस पर वास्तविक कब्जा है)

इस स्पष्टीकरण के परिणाम स्वरूप इस प्रश्न को लेकर उच्च न्यायालय के निर्णय में मतभेद था-  कि कब्जा रचनात्मक  सूचना( कब्जा धारक के हक की)  के रूप में लागू होगा कि नहीं - वह समाप्त हो गया है कब्जा सूचना के रूप में लागू होगा परंतु ऐसा कबजा जैसे कि स्पष्टीकरण करता है वास्तविक कब्जा होना चाहिए ना कि रचनात्मक कब्जा

इसका उदाहरण हमने आपको ऊपर दिया है द्वारा पढ़कर फिर समझ सकते हैं

सोमवार, 17 मई 2021

लाइन हाजिर क्या होता है नौकरी,promotion पर क्या प्रभाव पड़ता है

 लाइन हाजिर शब्द अंग्रेजों के जमाने का है मगर आप लोगों ने यह शब्द अकसर सुना होगा कि गलती कर देने पर या अपनी जिम्मेदारी निभाने पर किसी पुलिस वाले को लाइन हाजिर कर दिया गया है



अक्सर जब दरोगा या सिपाही कोई ऐसा कार्य करते हैं जहां पर जिम्मेदारी नहीं ले पाते हैं या पब्लिक का गुस्सा पुलिस या दरोगा पर होता है और जनता उन्हें सस्पेंड करने की मांग करती है  तब ऐसे पुलिसकर्मियों को कार्रवाई के नाम पर लाइन हाजिर कर दिया जाता है

और लाइन हाजिर का नाम सुनकर लोग समझ लेते हैं कि उनको उन्हें किए की सजा लाइन हाजिर  करने पर मिल गई है 
 
लेकिन हकीकत यह है सच यह है कि लाइन हाजिर पुलिस नियमावली में कोई कार्रवाई ही नहीं है लाइन हाजिर का मतलब है जहां पर आप की ड्यूटी है जो जिम्मेदारी आपको दी गई है उस्से हटाकर पुलिस लाइन में स्थानांतरण कर दिया जाता है लाइन हाजिर आप उसी तरह समझ सकते हैं जैसे कि एक थाने से दूसरे थाने या एक चौकी से दूसरे चौकी तबादला होता है

लाइन हाजिर में नौकरी पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

* जब किसी पुलिस स्टाफ को उसकी ड्यूटी से हटाना होता है तो उसे आवंटित कार्यस्थल से उसे प्रत्यक्ष अधिकारी के कार्यालय में ही ड्यूटी पर आना होता है उसे कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाती है इससे यह लाइन हाजिर किया लाइन अटैच कहते हैं


* लाइन हाजिर में पुलिस अफसर की नौकरी पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है

वेतन संबंधी इंक्रीमेंट या प्रमोशन संबंधी किसी भी प्रकार का फर्क नहीं पड़ता है

लाइन हाजिर करने का पुलिस नियमावली में कोई नियम ही नहीं है

* लाइन हाजिर को हम सजा के रूप में नहीं देख सकते हैं क्योंकि वहां पर पुलिस ऑफिसर का नाही वेतन संबंधी नुकसान होता है ना  कि कोई अन्य नुकसान होता है


विकास प्राधिकरण अप्रूव्ड कॉलोनी प्लाटिंग कौन सी होती है और फ्री होल्ड कॉलोनी जमीन कौन सी होती है

1 - D A  एप्रूव्ड ( डी ए से स्वीकृत)  वह जमीन जो विकाश प्राधिकरण किसानों से खरीद कर स्वयं या किसी बड़े बिल्डर से शहरी आवासीय योजना के मानको क...